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बैंक हुआ कंगाल, तो क्या होगा आपके पैसों का…? जानें क्या है नियम

यदि आपके पास है पैसा, सोना-चांदी या फिर कीमती सामान तो उसे घर पर रखना तो रिस्की हो सकता है. ऐसे में सबसे सेफ है बैंक, लेकिन क्या सच में बैंक एक सुरक्षित जगह है. देखिए हम आपको डराना नहीं चाहते बल्की अवगत कराना चाहते है उन आपदाओं से जिसे जानना आपके लिए जरूरी है.

 

दरअसल, हम बात कर रहे हैं बैंक की जहां आप अपने धन को सुरक्षित रखने के लिए जमा करते हैं. लेकिन तब क्या यदि किसी कारण वर्ष आपका बैंक बंद हो जाता है या फिर कंगाल हो जाता है. तो क्या ग्राहकों का पैसा, फिक्स डिपोजिट और सेविंग्स का क्या होगा, क्या वह रकम डूब जाएगी? इस सवाल की वजह है भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में खराब मैनेजमेंट को लेकर इसके निदेशक मंडल को भंग कर देना और बैंक पर कई पाबंदियां लगा देना. इस मामले के चलते बैंक के उपभोक्ताओं की भारी भीड़ लग गई और लोगों ने अपना पैसा निकालना चाहा लेकिन RBI के सख्त आदेश के चलते ऐसा नहीं हो सका. जिसके बाद से ग्राहकों के मन में यह डर है कि आखिर अब क्या होगा. सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्‍या बैंक डूब गया, तो क्‍या उनका पैसा भी डूब जाएगा?

 

बैंंक डूबा, तो क्या होगा ग्राहकों के पैसे का?

मोदी सरकार ने डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई बैंक कंगाल हो जाता है, तो बैंक में अकाउंट रखने वाले ग्राहकों की 5 लाख रुपये तक की रकम इंश्योर्ड रहती है. बैंक जिस तारीख को कंगाल या बंद होता है, उस तारीख से ग्राहक के अकाउंट में जो जमा और ब्याज होता है, उसमें से अधिकतम 5 लाख उसे मिल सकता है. इसे एक उदाहरण के रूप में समझिए, अगर रमेश के बैंक खाते में 10 लाख रुपये जमा हैं. कल अगर उसका बैंक बंद हो जाता है, तो उसे सिर्फ 5 लाख रुपये मिल सकते हैं, क्‍योंकि नियम के अनुसार अधिकतम 5 लाख रुपये ही इंश्योर्ड हैं. ये पैसा ग्राहकों को क्‍लेम करने के बाद 90 दिनों के भीतर मिल जाता है.

 

सरकार का क्या रुख होता है?

भारत सरकार और RBI मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि बैंकिंग प्रणाली स्थिर बनी रहे और ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहे. उदाहरण के लिए, 2020 में यस बैंक संकट के दौरान, सरकार और RBI ने मिलकर एक पुनर्गठन योजना बनाई जिससे बैंक को बचाया गया और जमाकर्ताओं की पूरी राशि सुरक्षित रही. इसी तरह, PMC बैंक संकट के समय भी जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विलय की प्रक्रिया अपनाई गई.

अगर बात पिछले सालों में आए बैंकिंग संकट की करें तो भारत में बीते कुछ सालों में कई बैंक संकट में आए, जिनमें PMC बैंक, यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक शामिल हैं.

PMC बैंक (2019): वित्तीय अनियमितताओं के चलते इस बैंक पर पाबंदियां लगाई गईं और बाद में इसे यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक में विलय कर दिया गया.

यस बैंक (2020): जब यस बैंक की वित्तीय स्थिति बिगड़ी, तो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित अन्य बैंकों ने इसमें निवेश किया और इसे बचाया गया.

लक्ष्मी विलास बैंक (2020): इस बैंक को DBS बैंक इंडिया के साथ विलय कर दिया गया ताकि जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहे.

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