बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हुई हिंसा, छात्रों के प्रदर्शन में गयी 39 लोगों की जान, 2000 से अधिक हुए घायल, यहाँ जानें सब कुछ

बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हुई हिंसा, छात्रों के प्रदर्शन में गयी 39 लोगों की जान, 2000 से अधिक हुए घायल, यहाँ जानें सब कुछ
बांग्लादेश में छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जो देखते-देखते अब उग्र और हिंसक हो चुका है। ऐसे में बांग्लादेश का छात्र विरोध प्रदर्शन देश के सबसे घातक दिनों में पहुंच गया है। छात्रों ने कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी। पुलिस के साथ झड़प में अब तक करीब 39 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। वहीं 2500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी जख्मी हैं। लाठी, डंडे और पत्थर लेकर सड़कों पर घूम रहे प्रदर्शनकारी बसों और निजी वाहनों को आग के हवाले कर रहे हैं।
इसलिए बांग्लादेश में हुई हिंसा-
दरअसल, बांग्लादेश सरकार ने सविल सेवा में अब आरक्षण प्रणाली को लागू करने का नया कानून बनाया है। जिसके चलते सिविल सेवा के आधे से अधिक पद अब आरक्षित हो चुके हैं। इसमें पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के मुक्ति संग्राम के फ्रीडम फाइटर के बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में बांग्लादेश के छात्र अब आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि देश में कोटा प्रणाली को समाप्त करना चाहिए। छात्रों का कहना है कि इस तरह के नियमों से सरकार समर्थक समूहों के बच्चों को लाभ मिलता है।
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में ऐसी होगी आरक्षण व्यवस्था-
बांग्लादेश में आरक्षण प्रणाली के तहत 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित हैं। इनमें से 30 प्रतिशत आरक्षण साल 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए रिजर्व है। वहीं, 10 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े प्रशासनिक जिलों के लिए और 10 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण रिजर्व है। इसके अलावा पांच प्रतिशत आरक्षण जातीय अल्पसंख्यक समूहों के लिए और एक प्रतिशत दिव्यांग लोगों के लिए भी रिजर्व किया गया है।
पीएम शेख हसीना के संबोधन के बाद और बढ़ी हिंसा
बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में हुई जनहानि पर गहरा खेद व्यक्त किया और कहा कि एक न्यायिक जांच समिति बनाई जाएगी। पीएम हसीना ने प्रदर्शनकारियों से देश की सर्वोच्च अदालत में विश्वास बनाए रखने को कहा क्योंकि यह मुद्दा उसके पास लंबित है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आंदोलनकारियों से धैर्य रखने का आग्रह करते हुए भरोसा दिया कि अदालत के ज़रिए उनको ‘इंसाफ़’ मिलेगा। उन्होंने लोगों से न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की।
उनके भाषण के बाद आरक्षण विरोधी आंदोलनकारियों ने ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया। रात से ही देश के विभिन्न इलाक़ों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। एक ओर आरक्षण का विरोध करने वाले सड़कों पर उतरे तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ पार्टी के विभिन्न संगठन भी सड़कों पर उतर आए।
उसके बाद राजधानी ढाका समेत विभिन्न इलाक़ों से कई मौत की खबरें सामने आयी।
अब तक की अपडेट:-
- बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर 64 जिलों में हो रहा है प्रदर्शन।
- पिछले एक साप्ताह में मारे गए 39 लोग, जिनमें से गुरुवार को सिर्फ 32 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक मरने वालों की संख्या और भी बढ़ने की आशंका है।
- प्रदर्शन को दबाने के लिए कई स्थानों पर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। चटगांव में राजमार्ग को अवरुद्ध करने वाले छात्रों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
- बढ़ती हिंसा के कारण अधिकारियों ने ढाका आने-जाने वाली रेलवे सेवाओं के साथ मेट्रो रेल सेवा भी बंद की।
- पुलिस की गोलाबारी से गयी दो तिहाई लोगों की जान।
- एक दिन में घायल हुए 700 लोग घायल हुए, जिनमें 104 पुलिस अधिकारी और 30 पत्रकार भी शामिल हैं।
- देश में लगभग पूरी तरह इंटरनेट सेवाएं बंद की गयी।
- प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिस कार्यालयों और सरकारी कार्यालयों में की आगजनी।
- देश के सरकारी प्रसारक ‘बांग्लादेश टेलीविजन’ का ढाका के मुख्यालय को तोड़ा गया।
- हिंसा के चलते सभी स्कूल-कॉलेज और यहां तक की दफ्तरों को भी बंद किया गया है
- दूतावास ने बांग्लादेश में मौजूद भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
- भारतीय समुदाय के लोग और छात्रों को यात्रा करने से बचने को कहा।





