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फैक्ट चेक: महाकुंभ में पकड़े गए अयूब की नहीं यह वायरल तस्वीर, पूरा सच जानने के लिए पढ़ें

फैक्ट चेक: महाकुंभ में पकड़े गए अयूब की नहीं यह वायरल तस्वीर, पूरा सच जानने के लिए पढ़ें

इन दिनों देश व दुनिया में महाकुंभ की गूंज है। ऐसे में सोशल मीडिया पर भी महाकुंभ को लेकर कई प्रकार की खबरें वायरल हो रही हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक तस्‍वीर वायरल हो रही है। जहां एक साधु को दो पुलिस कर्मियों के बीच बंदी बनकर खड़े हुए देखा जा सकता है। इसी तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि साधु के वेश में एक अयूब नामक आंतकी वहां पकड़ाया है।

फेसबुक पर वायरल तस्वीर को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि, “महाकुंभ मेले में आतंकी “अयूब खान” गिरफ्तार…वह साधु बनकर आया था और साधुओं में मिल गया था। उसने सबसे बड़ा अपराध करने की साजिश रची थी। भगवान की कृपा से हमारे साधुओं ने इस आतंकी की करतूतों पर ध्यान दिया और इसे पुलिस के हवाले कर दिया।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक: 

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल तस्वीर असली नहीं है।

सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने यह जानने का प्रयास किया कि क्या प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में किसी अयूब को पकड़ा गया है या नहीं? इस बात की जानकारी जानने के लिए हमने गूगल पर कुछ संबंधित कीवर्ड्स के माध्यम से खोजना शुरू किया।

खोज के दौरान हमें वायरल दावे के संबंध में दैनिक जागरण की वेबसाइट पर जनवरी 13, 2025 को छपे गए एक लेख में जानकारी मिली। लेख के मुताबिक, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी के महाकुंभ में कैंप के बाहर से पुलिस ने अयूब नाम के संदिग्ध युवक को पकड़ा है। दावा किया जा रहा है कि वह आयुष नाम बताकर अंदर पहुंचा था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। यहाँ पकड़े गए अयूब की तस्वीर भी छापी गयी थी जो वायरल तस्वीर से बिलकुल भी मेल नहीं खा रही थी।

 

इसलिए वायरल तस्वीर की सत्यता जानने के लिए हमने बारीकी से खोजा। उक्त तस्वीर को देखने पर हमें इसके असली न होने की आशंका हुई जिसके बाद हमने AI Image Decetor टूल Hive Moderation पर वायरल तस्वीर की जांच की। जहां हमने जाना कि वायरल तस्वीर AI जेनेरेटेड है।

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल तस्वीर असली नहीं बल्कि AI Generated नहीं है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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