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पुणे की IAS अधिकारी पूजा खेडकर की ट्रेनिंग पर लगी रोकी, अकादमी में वापस बुलाया गया

पुणे: विवादों में घिरने के बाद आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को महाराष्ट्र में जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम से हटा दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य सरकार ने मंगलवार को खेडकर को मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में वापस बुलाने का फैसला किया. इसके साथ ही एकेडमी ने उन्हें तत्काल वापस बुलाने के लिए लेटर भी जारी किया है. इसके अलावा एकेडमी ने महाराष्ट्र सरकार को भी इस संबंध में पत्र लिखकर सूचित किया गया है.

 

  • LBSNAA द्वारा पूजा खेडकर को जारी आदेश में कहा गया है, “आपके जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित रखने तथा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए आपको तुरंत वापस बुलाने का निर्णय लिया है. अतः आपको महाराष्ट्र राज्य सरकार के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम से मुक्त किया जाता है. एकेडमी का पत्र इसके साथ संलग्न है. आपको यथाशीघ्र, किन्तु किसी भी परिस्थिति में 23 जुलाई, 2024 के बाद एकेडमी में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है.”

  • दरअसल, पूजा खेडकर पर आरोप है कि पूजा खेडकर ने दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से बीमार होने का प्रमाण पत्र जमा करके यूपीएससी परीक्षा में हिस्सा लिया था. उसके आधार पर विशेष रियायतें पाकर वो आईएएस बनीं. यदि उन्हें यह रियायत नहीं मिलती तो उनके लिए प्राप्त अंकों के आधार पर आईएएस पद प्राप्त करना असंभव होता.
  • पूजा पर आरोप है कि चयन के बाद पूजा को मेडिकल जांच से गुजरना था, लेकिन उन्होंने इसे टाल दिया. उन्होंने विभिन्न कारणों से छह बार मेडिकल परीक्षण से इनकार कर दिया. बाद में बाहरी मेडिकल एजेंसी से एमआरआई रिपोर्ट जमा करने का विकल्प चुना, जिसे यूपीएससी ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया. हालांकि बाद में यूपीएससी ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. इसके चलते सरकार से इसकी जांच की मांग की जा रही है.
  • पुणे कलेक्टर सुहास दिवसे ने सामान्य प्रशासन विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 3 जून को आधिकारिक तौर पर अपनी ड्यूटी शुरू करने से पहले ही खेडकर द्वारा एक अलग केबिन, कार, आवासीय क्वार्टर और एक चपरासी की बार-बार की गई मांगों का विवरण दिया गया था. जब इन सुविधाओं से इनकार कर दिया गया, तो उन्होंने कथित तौर पर नेमप्लेट हटा दी. एक वरिष्ठ अधिकारी और उसके ड्योढ़ी को अपने कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करती थी.
  • पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने भी खेडकर की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह ओबीसी गैर-क्रीमी लेयर के अंतर्गत नहीं आतीं क्योंकि उनके पिता के पास 40 करोड़ रुपये की संपत्ति थी.
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