द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचें पीएम मोदी, कहा- “देश हमारी सेना के पराक्रमी महानायकों का सदा सर्वदा ऋणी है”

द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचें पीएम मोदी, कहा- “देश हमारी सेना के पराक्रमी महानायकों का सदा सर्वदा ऋणी है”
23 साल पहले आज ही के दिन भारतीय सेना ने कारगिल में उन सभी भारतीय चेक पोस्ट्स पर फिर से कब्जा कर जमा लिया था जिनकों पाकिस्तानी सेना ने अपने में कब्जे में लिया था। तब से हर साल 26 जुलाई को कारगिल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी शुक्रवार को लद्दाख के कारगिल में ‘कारगिल युद्ध स्मारक ‘ पहुंचें और शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
#WATCH द्रास, कारगिल (लद्दाख): 25वें कारगिल विजय दिवस 2024 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल युद्ध स्मारक पर कारगिल युद्ध के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। pic.twitter.com/osoQpxFNoF
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 26, 2024
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25वें कारगिल विजय दिवस 2024 पर पुष्पांजलि समारोह में शामिल हुए। यहाँ उन्होंने कहा कि “आज लद्दाख की ये महान धरती कारगिल विजय के 25 वर्ष पूरे होने की साक्षी बन रही है। कारगिल विजय दिवस हमें बताता है कि राष्ट्रीय के लिए दिए गए बलिदान अमर होते हैं। दिन, महीने, वर्ष, सदियां गुजरती हैं, मौसम भी बदलते हैं लेकिन राष्ट्र की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वालों के नाम अमिट रहते हैं। ये देश हमारी सेना के पराक्रमी महानायकों का सदा सर्वदा ऋणी है…”
कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कारगिल युद्ध के समय मैं सामान्य देशवासी के रूप में अपने सैनिकों के बीच था। आज मैं फिर कारगिल की धरती पर हूं तो स्वाभाविक है वो स्मृतियां मेरे मन में ताजा हो गई हैं। मुझे याद है किस तरह हमारी सेनाओं ने इतनी ऊंचाई पर, इतने कठिन युद्ध ऑपरेशन को अंजाम दिया था। मैं देश को विजय दिलाने वाले ऐसे सभी शूरवीरों को आदरपूर्वक प्रणाम करता हूं…”
वह बोले कि, “कारगिल में हमने केवल युद्ध नहीं जीता था। हमने सत्य, संयम और सामर्थ का अद्भुत परिचय दिया था। भारत उस समय शांति के लिए प्रयास कर रहा था। बदले में पाकिस्तान ने फिर एक बार अपना अविश्वासी चेहरा दिखाया। लेकिन सत्य के सामने असत्य और आतंक की हार हुई।”
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि, “पाकिस्तान ने अतीत में जितने भी दुष्प्रयास किए उसे मुंह की खानी पड़ी लेकिन पाकिस्तान ने अपने इतिहास से कुछ नहीं सीखा है। वो आतंकवाद के सहारे अपने आप को प्रासंगिक बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। लेकिन आज जब मैं उस जगह से बोल रहा हूं जहां आतंक के आकाओं को मेरी आवाज सीधे सुनाई पड़ रही है मैं आतंकवाद के इन सरपरस्तों को कहना चाहता हूं कि उनके नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। आतंकवाद को हमारे जाबाज पूरी ताकत से कुचलेंगे। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ”
उन्होंने कहा कि “कुछ ही दिन बात 5 अगस्त को धारा 370 का अंत हुए 5 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर आज नए भविष्य की बात कर रहा है, बड़े सपने की बात कर रहा है। जम्मू-कश्मीर की पहचान जी-20 समिट की अहम बैठक करने के लिए हो रही है… दशकों बाद कश्मीर में सिनेमाघर खुला है… धरती का हमारा स्वर्ग तेजी से शांति और सौहार्द की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “…हमारी सेनाओं ने बीते वर्षों में कई साहसिक निर्णय लिए हैं। सेना द्वारा किए गए जरूरी सुधार का एक उदाहरण अग्निवीर योजना भी है। दशकों तक संसद तक अनेक कमेटी तक में सेनाओं को युवा बनाने पर चर्चाएं होती रहीं। भारत की सैनिकों की औसत आयु ग्लोबल औसत से अधिक होना हम सभी की चिंता बढ़ाता रहा है। इसलिए ये विषय वर्षों तक अनेक कमेटियों में भी उठा। लेकिन देश की सुरक्षा से जुड़ी इस चुनौती के समाधान की पहले इच्छाशक्ति नहीं दिखाई दी। शायद कुछ लोगों की मानसिकता ही ऐसी थी कि सेना मतलब नेताओं को सलाम करना, परेड करना।
वह बोले कि हमारे लिए सेना मतलब 140 करोड़ देशवासियों की आस्था, 140 करोड़ देशवासियों की शांति की गारंटी, देश की सीमाओं को सुरक्षा की गारंटी… अग्निपथ का लक्ष्य सेनाओं को युवा बनाना है, अग्निपथ का लक्ष्य सेनाओं को युद्ध के लिए निरंतर योग्य बनाए रखना है। दुर्भाग्य से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील विषय को कुछ लोगों ने राजनीति का विषय बना दिया है। कुछ लोग सेना के इस सुधार पर भी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में झूठी राजनीति कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने सेनाओं में हजारों-करोड़ों के घोटाले करके हमारी सेनाओं को कमजोर किया है। ये वही लोग हैं जो चाहते थे कि एयरफोर्स को कभी आधुनिक फाइटर जेट न मिल पाए। ये वही लोग हैं जिन्होंने तेजस फाइटर प्लेन को भी डिब्बे में बंद करने की तैयारी कर ली थी।”





