दिल्ली-NCR में कंपनियां बेच रहीं अंडरग्राउंड CBRN, 10 महीनों तक सुरक्षा की गारंटी

देश इन दिनों जंग की आग में जूझ रहा है. इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है वहीं अब देश भी इस बात से डरा हुआ है कि कब यह युद्ध बढ़ जाए और कहीं दूसरे देश भी आपस में लड़ ना बैठे. वहीं इस चिंता की समझ रखते हुए भारत में लोगों की सुरक्षा के प्रति अभी से कदम उठाए जा रहे हैं.
देश की राजधानी दिल्ली कई ऐसी कंपनिया हैं जो युद्ध के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने के लिए घरों में बंकर की सुविधा दे रही है.
आपने देखा होगा कि युद्ध के दौरान आम लोगों को बंकरों में भेजा जाता है. बंकरों पर गोला-बारूद का कोई असर नहीं होता. वहीं इन बंकरों को एनसीआर में कई ऐसी कंपनियां है जो अंडरग्राउंड CBRN बेच रही है इसका मतलब है कि केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर बंकर.
चलिए अब बात करें बंकर में मिलने वाली सुविधा और कमरों की
बंकर में कमरों की बात करें तो इन बंकरों में इतनी जगह होगी कि दो एडल्ट और एक बच्चा एक महीने तक रह सकते हैं. साथ ही खाना-पीना स्टोर करने के लिए भी पर्याप्त जगह होगी. अब देखिए जैसे कि आप एक होटल में जाते हैं तो वहां आपको कई वेरायटी के रूम मिलते हैं वैसे ही इन बंकर में भी अलग-अलग वेरायटी अवेलेबल हैं. एक कैटेगरी है ट्रायम्फ. इसमें आपको बना-बनाया घर मिलेगा जिसे बस जमीन के अंदर फिट करना होगा. यहां 8 लोग करीब तीन सौ दिनों तक छिपे रह सकते हैं. सबसे प्रीमियम क्वालिटी का शेल्टर किसी आलीशान हवेली जितना बड़ा और विशाल है. तीन हजार वर्ग फीट के इन घरों में 15 से लेकर दो-चार और लोग भी आराम से एडजस्ट हो सकते हैं. स्टोरेज एरिया इससे लगभग दोगुना है. यहां इतना खाना, पानी और बिजली होगी जो एक साल से लेकर तीन साल तक चल सकती है.
सैन्य बंकरों से अलग है CBRN
सीबीआरएन शेल्टर सैन्य बंकरों से काफी अलग है. सेना के बंकर जमीन में काफी गहराई में दवे होते हैं, लेकिन यह उनते गहने नहीं होते. ऐसे में अगर कोई बम सीधे बंकरों पर गिर जाए तो बचना मुश्किल है. हालांकि बनाने वाले बताते हैं कि हमाले बंकर लोगों को बम या फिर न्यूक्लियर पावर के दौरान जमीन पर होने वाले धमाकों से बचने के लिए बनाएं हैं. आसान शब्दों में बताएं तो जब जमीन पर अफरा-तफरी मचे तो लोग नीचे इन बंकरों में सुरक्षित रह सकें और खतरा कम होने या खत्म होने पर ही बाहर आए.





