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फेतहगढ़ साहेब से शंभू बॉर्डर पर जमा हुई किसानों की भीड़, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले

नई दिल्ली: किसानों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ सोमवार रात पांच घंटे से ज्यादा लंबी बैठक बेनतीजा रही. किसानों ने दिल्ली कूच शुरू कर दिया है. फेतहगढ़ साहेब से शंभू बॉर्डर पर जमा हुई किसानों की भीड़ पर पुलिस ने सख्ती दिखाते आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद वहां अफरातफरी मच गई. बता दें कि किसानों की मुख्य मांग फसलों के अधिकतम समर्थन मूल्य पर कोई समाधान नहीं हो सका. किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘दिल्ली चलो’ विरोध मार्च के मद्देनजर दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाई गई.

 

किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च से पहले आज गाज़ीपुर बॉर्डर पर भारी ट्रैफिक जाम देखा गया.

 

फतेहगढ़ साहिब, किसान संगठनों के ‘दिल्ली चलो’ विरोध मार्च पर किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “… हमने कल की बैठक में एक समाधान खोजने की कोशिश की ताकि हम सरकार से टकराव से बचे और हमें कुछ मिले… हमने कल उनके सामने हरियाणा की स्थिति रखी…पंजाब और हरियाणा के लोगों पर अत्याचार हो रहा है… ऐसा लगता है कि ये दोनों राज्य अब भारत का हिस्सा नहीं हैं, इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सीमा माना जा रहा है…”

 

महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “…कांग्रेस हमें कोई सपोर्ट नहीं करती है. हम कांग्रेस को भी उतना ही दोषी मानते हैं जितनी भाजपा दोषी है… हम किसी के पक्ष वाले लोग नहीं हैं. हम किसान और मजदूर की आवाज उठाने वाले लोग हैं.”

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “…पूरा बॉर्डर सील कर दिया गया है जैसे ये कोई दुश्मन देशों का बॉर्डर हो… हरियाणा-पंजाब, दिल्ली से सटे राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सटे दिल्ली के पड़ोसी जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं वो भी तब जब बोर्ड पेपर सर पर हैं… दिल्ली के चारो तरफ के जिलो में मौखिक हिदायत दी गई है कि किसी किसान के ट्रैक्टर में 10 लीटर से ज्यादा डीज़ल ना डाला जाएगा… चौतरफा जुल्म का आलम है. अन्नदाता किसानों की हुंकार से डरी हुई मोदी सरकार एक बार फिर 100 साल पहले अंग्रेज़ों द्वारा दमनकारी 1917 के बिहार के चंपारण किसान आंदोलन… खेड़ा आंदोलन की याद दिला रही है.”

 

दिल्ली ईस्टर्न रेंज के ज्वाइंट CP सागर सिंह कलसी ने कहा, “किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘दिल्ली चलो’ विरोध मार्च को लेकर हमने बहुत कड़े इंतजाम किए हैं… हमारा लक्ष्य है कि किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से रोका जाए और ट्रैफिक को लेकर असुविधा ना हो… हमारी पूरी कोशिश है कि हम इस स्थिति से शांतिपूर्ण निपट लेंगे…”

 

किसानों ने बैठक के बाद कहा कि बातचीत बेनतीजा रही, हम सुबह 10 बजे दिल्ली की तरफ मार्च (Farmer’s Protest) शुरू करेंगे. साथ ही किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के मन में खोट है. केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों की तरफ से ‘दिल्ली चलो’ मार्च का आह्वान किया गया है.

 

रात 11 बजे के बाद किसानों और सरकार के बीच बिजली कानून 2020 को रद्द करने, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों को मुआवजा देने और किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने पर सहमति बनी.

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