कैसे होता है लोकसभा अध्यक्ष पद का चुनाव, क्या होती हैं स्पीकर की शक्तियां? यहाँ पढ़ें

कैसे होता है लोकसभा अध्यक्ष पद का चुनाव, क्या होती हैं स्पीकर की शक्तियां? यहाँ पढ़ें
लोकसभा 2024 के चुनावों के बाद व केंद्र में मोदी 3.o के गठन के बाद पहली बार संसद सत्र शुरू होगा। लेकिन सत्र शुरू होने से पहले 26 जून को लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा। बता दें कि इस बार के लोकसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसे में लोकसभा स्पीकर का पद काफी अहम हो जाता है। फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर अटकलें लगातार जारी है।
बता दें कि आमतौर पर सत्ताधारी दल के सदस्य ही स्पीकर पद के लिए चुने जाते हैं। परंपरा के अनुसार सत्ताधारी पार्टी अन्य दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा करती है। पिछले दो बार के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के आंकड़े को अकेले ही प्राप्त करते आरही है, जिसके चलते लोकसभा स्पीकर बीजेपी द्वारा ही नियुक्त किया जा रहा था। लेकिन इस बार ऐसा हुआ कि लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत का आंकड़ा नहीं मिला है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की 240 सीटें आई, यानी कि बहुमत के आंकड़े से 32 सीटें कम।
ऐसे इस बार बीजेपी सहयोगियों पर निर्भर हैं। आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी और बिहार के नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड भाजपा की सहयोगी दल है जिन्होंने भाजपा को केंद्र में अपनी सरकार बनाने में अपना सहयोग दिया है। ऐसे में ये जानना बेहद जरुरी है कि अखिर लोकसभा अध्यक्ष चुने कैसे जाते हैं और उनके कार्य एवं शक्तियां क्या होती हैं?
कैसे चुना जाता है लोकसभा अध्यक्ष
अध्यक्ष के चुनाव के नियम संविधान के अनुच्छेद 93 में निर्धारित किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष बनने के लिए सबसे पहली शर्त होती है कि स्पीकर को सदन का सदस्य होना चाहिए। इसके अलावा अध्यक्ष पद के लिए कोई विशेष क्वालिफिकेशन का प्रावधान नहीं है। परंपरागत प्रक्रिया के अनुसार संसद सत्र शुरू होने से पहले राष्ट्रपति नवनिर्वाचित सांसदों को उनके पद की शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करते हैं।
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष का चयन किया जाता है। आमतौर पर सत्ताधारी दल के सदस्य ही स्पीकर पद के लिए चुने जाते हैं।उम्मीदवार का फैसला किए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री या प्रधानमंत्री अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम का प्रस्ताव रखते हैं। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव बड़े ही आसान बहुमत से होता है। यानी कि सदन में मौजूद आधे से ज्यादा सदस्यों को लोकसभा के अध्यक्ष बनने के लिए किसी खास उम्मीदवार को वोट करना होता है। हालांकि, अगर किसी नाम पर सदस्य एकमत न हों तो ऐसी स्थिति में अध्यक्ष के चयन के लिए वोटिंग कराई जाती है।
क्या होती है अध्यक्ष पद की शक्तियां
लोकसभा अध्यक्ष का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि वह सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और उन पर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारी होती है। लोकसभा स्पीकर संसदीय बैठकों के लिए एजेंडा भी तय करते हैं और स्थगन तथा अविश्वास प्रस्ताव जैसे प्रस्तावों को भी अनुमति देते हैं। सदन में किसी नियम को लेकर अगर कोई विवाद होता है तो अध्यक्ष इन नियमों की व्याख्या करते हैं और उन्हें लागू भी करते हैं, जिसको चुनौती नहीं दी जा सकती। क्योंकि सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सदस्य होते हैं, इसीलिए अध्यक्ष की कुर्सी गैर पक्षपाती होनी चाहिए
लोकसभा अध्यक्ष के पास संविधान की 10 वी अनुसूची के तहत अनियंत्रित व्यवहार को दंडित करने का अधिकार होता है। वहीं दलबदल के आधार पर अगर कोई सदस्य सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करता है तो सदस्यों को अयोग्य ठहराने व उसकी सदस्यता भी निलंबित करने का भी पूरा अधिकार अध्यक्ष के पास होता है।





