कही इंटरनेट आपको भी तो नहीं बना रहा Idiot Syndrome का शिकार ? जाने क्या है Idiot Syndrome

आजकल इंटरनेट हर छोटे से छोटे कसबे और घर तक पहुंच चुका है. वहीं इस इंटरनेट के माध्यम से लोगों के जीवन की काफी चीजे आसान हो गई हैं. लोग अकसर हर छोटी-बड़ी जानकारी के लिए इंटरनेट की मदद लेते हैं. इंटरनेट की दुनिया बहुत बड़ी हैं जिसमें हर विषय में जुड़ी जानकारी मौजूद है. लेकिन इन दिनों इंटरनेट का यही ज्ञान इन दिनों लोगों को Idiot Syndrome का शिकार बना रहा है. अब आप सोच रहे होंगे कि यह इडियट सिंड्रोम क्या है तो परेशान ना होइए चलिए हम आपको बताते है कि आखिर यह इडियट सिंड्रोम है क्या और इसके प्रभाव क्या है.
इन दिनों लोगों के बीच इंटरनेट का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. बिना इंटरनेट अब लोगों का जीवन अधूरा सा हो गया है. क्योंकि अब इंटरनेट की मदद से आप कही भी कभी भी किसी भी तरह की जानकारी अथवा मदद की अपेक्षा कर सकते हैं पर इन दिनों यह अपेक्षा लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बन रही है.
दरअसल, अपना नॉलेज बढ़ाने के साथ ही लोग अपनी हेल्थ की जानकारी लेने तक के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. यह कुछ हद तक तो ठीक है पर इंटरनेट को ही अपना डॉक्टर बना लेना, बिना डॉक्टर की सलह लिए अपने स्वास्थ को इंटरनेट के भरोसे ट्रीट करना यह आपकी सेहत के लिए हानीकारक है. इंटरनेट पर अपनी बीमारी का निदान करने की आदत की वजह से लोग “इडियट सिंड्रोम” का शिकार हो रहे हैं. ये एक ऐसी कंडीशन है जिसमें लोग हेल्थ प्रोफेशनल से ज्यादा इंटरनेट पर भरोसा करने लगते हैं. इसीलिए इसे इडियट सिंड्रोम नाम दिया गया है.
हालांकि यहां Idiot का मतलब इंटरनेट डिराइव्ड इंफॉर्मेशन ऑब्सट्रक्शन ट्रीटमेंट (Internet Derived Information Obstruction Treatment) से है.
इडियट सिंड्रोम का शिकार वाले मरीज अक्सर तमाम लक्षणों को इंटरनेट पर सर्च करके ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि कहीं उन्हें कोई बड़ी बीमारी तो नहीं है. ऐसे लोग इंटरनेट को अपना टीचर समझ खुद की बीमारी का पता लगाने के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं और खुद अपना इलाज करना शुरू कर देते हैं. लेकिन यह गलत है आपको लगता है कि आप होशियार हो गए है आप खुद की मदद कर रहे हैं बल्कि ऐसा नहीं है आप अपने जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. इस तरह इंटरनेट के माध्यम से खुद उपचार करने से उन्हे गलत इलाज मिल सकता है और आगे चलकर वो मानसिक रूप से भी अपने लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं.
डब्ल्यूएचओ इसे “इन्फोडेमिक” कहता है, जिसने स्वास्थ्य सेवा में एक मुश्किल हालात पैदा कर दिए हैं, क्योंकि इसने बीमारी के प्रकोप के दौरान डिजिटल और फिजिकल वातावरण में बहुत ज्यादा जानकारी पैदा कर दी है और स्वास्थ्य अधिकारियों में अविश्वास पैदा हो गया है.
लोगों को कैसे प्रभावित करता है यह सिंड्रोम?
IDIOT सिंड्रोम मनुष्य पर मानसिक प्रभाव डाल सकता है. यह एक ऐसी मानसिकता को जन्म दे सकता है, जिसमें मरीज चिकित्सा और चिकित्सकों पर अविश्वास करना शुरू कर देते हैं और खुद अपना ट्रीटमेंट करना चुनते हैं. यह सोच और आदत पहले से किसी बीमारी का शिकार लोगों के ट्रीटमेंट में बाधा डाल सकता है, जिससे मरीज की हालात गंभीर रूप से खराब हो सकती है.
एक डॉक्टर आपके लक्षणों को समझकर जरूरी जांचें करवाकर किसी नतीजे पर पहुंचते हैं और तब आपको बीमारी का इलाज देते हैं. सेहत के मामले में इंटरनेट को डॉक्टर मान लेना आपके लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है. ऐसे में न्यूज़मोबाइल की अपील है कि जागरुक नागरिक बने ना की अज्ञानी… ज्ञान ले पर किसी भी चीज पर आंख बंद करके विश्वास ना करें.





