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‘हम दुनिया को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर चुके हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय शक्ति हैं’: विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर

नई दिल्ली: आज हमारा वैश्विक स्तर बहुत ऊंचा है. आज हम अपनी सोच, अभियान और विदेश नीति को लागू करने की रणनीति को लेकर पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हैं और ये होना भी चाहिए. आज वैश्विक मामलों पर वे (विश्व) जानना चाहते है कि भारत का क्या मानना है? ये वैश्विक मामले जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद का मुकाबला, ब्लैक मनी, सुरक्षा आदि कुछ भी हो सकता है. हम दुनिया को बहुत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर चुके हैं कि हम अंतरराष्ट्रीय शक्ति हैं. हम इस समय दूसरे देशों के लिए अन्य देशों की तुलना में अधिक काम करने के लिए तैयार हैं

 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एएनआई के साथ हुए इंटरव्यू में विदेश सेवा से लेकर राजनीति तक के अपने सफर के बारे में बात की. उन्होने बताया कि, ये कैबिनेट या सरकार (BJP) एक टीम कैबिनेट है इसमें हम अपने निर्णय नहीं ले सकते बल्कि पूरी टीम लेती है. जब मुझे मंत्री के रूप में चुना गया था तब मैं सांसद नहीं था और न ही कोई राजनीतिक पार्टी का सदस्य था मेरे पास विकल्प था कि मैं राजनीतिक पार्टी चुनूं या नहीं. मैंने इस पार्टी को इसलिए चुना क्योंकि ये पार्टी देश की भावनाओं को अच्छे से समझती है.

 

आप जब कैबिनेट का हिस्सा होते हैं तो आपको बहुत कुछ जानने को मिलता है. मेरे पिता सरकारी अधिकारी थे और वो 1979 में जनता सरकार में सचिव बने थे लेकिन उन्हें सचिव पद से हटा दिया गया था. 1980 में वे रक्षा उत्पादन सचिव थे. जब इंदिरा गांधी दोबारा चुनी गईं थीं तब उन्होंने उनको पद से हटा दिया था. वे काफी ज्ञानी थे, शायद यही दिक्कत थी.

 

प्रधानमंत्री ने मुझे कैबिनेट में शामिल होने के लिए कहा था. 2011 में मैंने उनसे बीजिंग में मुलाकात की थी, उससे पहले मैं उनसे कभी नहीं मिला था. जब वे CM (गुजरात) थे और वे उस समय वहां (चीन) दौरे पर गए थे. सच कहूं तो उन्होंने मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला था:विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर

 

मंत्री जयशंकर ने कहा कि वह नौकरशाहों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं और केंद्रीय मंत्री के रूप में राजनीतिक अवसर 2019 में अप्रत्याशित रूप से आया. 1980 में सत्ता में वापस आने के तुरंत बाद पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा और उन्हें राजीव गांधी काल के दौरान कैबिनेट सचिव बनने के लिए किसी जूनियर के साथ पदावनत कर दिया गया था.

 

विदेश मंत्री ने अपने इस इंटरव्यू में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की आक्रामकता को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि यह कांग्रेस नेता नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं जिन्होंने वास्तविक रेखा पर सेना भेजी थी. चीन द्वारा सेना की तैनाती के जवाबी उपाय के रूप में नियंत्रण और विपक्षी दल को 1962 में जो कुछ हुआ उसे देखने के लिए ईमानदारी रखनी चाहिए.

 

उन्होंने आगे कहा मैं सबसे लंबे समय तक चीन का राजदूत रहा और बॉर्डर मु्द्दों को डील कर रहा था. मैं ये नहीं कहूंगा कि मुझे सबसे अधिक ज्ञान है मगर मैं इतना कहूंगा कि मुझे इस (चीन) विषय पर काफी कुछ पता है. अगर उनको (राहुल गांधी) चीन पर ज्ञान होगा तो मैं उनसे भी सीखने के लिए तैयार हूं.

 

विदेश मंत्री ने अपने इस इंटरव्यू में BBC डॉक्यूमेंट्री पर भी बात की और कहा, आपको क्या लगता है कि ये (BBC डॉक्यूमेंट्री) अचानक आया है. मैं ये बताना चाहता हूं कि चुनाव का समय भारत और दिल्ली में शुरू हुआ हो या नहीं, लेकिन न्यूयॉर्क और लंदन में जरूर शुरू हो गया है. कभी कहा जाता है कि सरकार रक्षात्मक है, कभी कहा जाता है कि सरकार उदार हो रही है. अगर हम उदार हैं तो LAC पर आर्मी को किसने भेजा? राहुल गांधी ने आर्मी को नहीं भेजा, नरेंद्र मोदी ने भेजा.

 

ये समझना मुश्किल क्यों है कि जो विचारधार और राजनीतिक पार्टियां भारत के बाहर हैं, उससे मिलती जुलती विचारधारा और पार्टियां भारत के अंदर भी हैं और दोनों एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं: विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर

 

उन्होंने आगे कहा, कई बार भारत में चल रही राजनीति यहां की नहीं बल्कि बाहर से आई होती है. विचार और एजेंडा बाहर से आए होते हैं. आप डॉक्यूमेंट्री ही बनाना चाहते हैं तो दिल्ली में 1984 में बहुत कुछ हुआ था. हमें उस विषय पर कोई डॉक्यूमेंट्री देखने को क्यों नहीं मिली? ये बस केवल एक राजनीति है, जो उन लोगों के द्वारा की जा रही है जिनमें राजनीतिक क्षेत्र में आने की ताकत नहीं है. वे खुद को बचाने के लिए कहते हैं कि हम एक NGO, मीडिया संगठन आदि हैं, लेकिन वे राजनीति कर रहे हैं.

 

जयशंकर ने विदेश सेवा से लेकर राजनीति तक के अपने सफर के बारे में बात की. उन्होने बताया कि, ये कैबिनेट या सरकार (BJP) एक टीम कैबिनेट है इसमें हम अपने निर्णय नहीं ले सकते बल्कि पूरी टीम लेती है. जब मुझे मंत्री के रूप में चुना गया था तब मैं सांसद नहीं था और न ही कोई राजनीतिक पार्टी का सदस्य था मेरे पास विकल्प था कि मैं राजनीतिक पार्टी चुनूं या नहीं. मैंने इस पार्टी को इसलिए चुना क्योंकि ये पार्टी देश की भावनाओं को अच्छे से समझती है. आप जब कैबिनेट का हिस्सा होते हैं तो आपको बहुत कुछ जानने को मिलता है. मेरे पिता सरकारी अधिकारी थे और वो 1979 में जनता सरकार में सचिव बने थे लेकिन उन्हें सचिव पद से हटा दिया गया था. 1980 में वे रक्षा उत्पादन सचिव थे. जब इंदिरा गांधी दोबारा चुनी गईं थीं तब उन्होंने उनको पद से हटा दिया था. वे काफी ज्ञानी थे, शायद यही दिक्कत थी.

 

प्रधानमंत्री ने मुझे कैबिनेट में शामिल होने के लिए कहा था. 2011 में मैंने उनसे बीजिंग में मुलाकात की थी, उससे पहले मैं उनसे कभी नहीं मिला था. जब वे CM (गुजरात) थे और वे उस समय वहां (चीन) दौरे पर गए थे. सच कहूं तो उन्होंने मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला था:विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर

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