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बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 100 तक पहुंची

एक महीने से भी कम समय में बिहार के उत्तरी क्षेत्र में 100 से अधिक बच्चों की मौत हो गई, जो कथित रूप से एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से त्रस्त है. स्थानीय तौर पर इसे चमकी बुखार (एक तरह का दिमागी बुखार) के रूप में जाना जाता है.

मुजफ्फरपुर में, अनौपचारिक रिकॉर्ड बताता है कि 1 जून, 2019 से श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) और केजरीवाल अस्पताल (निजी) में संदिग्ध चमकी बुखार के 288 से अधिक मामले आ चुके हैं. चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, शरीर के बढ़ते तापमान के साथ साथ इसके लक्षणों में बेहोशी, तेज बुखार, उल्टी और मतली शामिल हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, “चूंकि राज्य सरकार के अधिकारी हाल के महीनों में चुनाव से जुड़े कामों में लगे हुए थे, इसलिए वे जागरूकता अभियान नहीं चला सके जैसे कि यह होना चाहिए था… हम सावधान हैं और हम मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की स्थिति से निपटने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठा रहे हैं.

लांसेट ग्लोबल हेल्थ ने 2014 में चमकी बुखार के कारण दर्ज की गई मौतों के बाद एक सर्वेक्षण किया था, जिससे लीची की खपत और चमकी बुखार से होने वाली मौतों के बीच एक कड़ी सामने आयी. पिछले दशक में राज्य ने संदिग्ध चमकी बुखार से 400 से अधिक मौतों का ट्रैक रिकॉर्ड रखा है, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुसार चमकी बुखार “आम तौर पर उन बच्चों पर असर करता है जो रात में खाली पेट सोते हैं और जमीन पर गिरी हुई लीची खाते हैं”.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, हर्षवर्धन ने रविवार, 16 जून को मुज़फ़्फ़रपुर में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) का दौरा किया था, जहाँ पिछले दो सप्ताह में अधिकांश बच्चों की मृत्यु हुई है.

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उन्होंने अस्पताल में अपने दौरे के दौरान एक पांच साल की बच्ची की मौत देखी, और मृतक बच्चे के परिजनों ने दौरे पर आये तीन मंत्रियों का सामना किया।इसके अलावा, एक बयान में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यहाँ के डॉक्टर बच्चों का इलाज करने में इतनी कठिन परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीमारी के कारण की पहचान करने के लिए अगले एक साल में यहां एक बहु-अनुशासनात्मक संस्थान स्थापित किया जाएगा।

मुजफ्फरपुर से पटना लौटने पर मंत्री वर्धन को विरोध का सामना करना पड़ा और उनके सामने काले झंडे लहराए गए.

चमकी बुखार के कारण हो रही मौतों की संख्या हर घंटे के साथ बढ़ रही है. 2012 में इसी बीमारी की महामारी में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गयी थीं.

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