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फैक्ट चेक: हथियारों के साथ डांस करते हुए पूर्व MLA प्रणव सिंह चैंपियन का वीडियो हालिया दिनों का नहीं, जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: हथियारों के साथ डांस करते हुए पूर्व MLA प्रणव सिंह चैंपियन का वीडियो हालिया दिनों का नहीं, जानें पूरा सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक शख्स हथियारों को लेकर एक कमरे में नाचता हुआ दिखाई। इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर हालिया दिनों में शेयर कर दावा किया जा रहा है कि हथियारों के साथ नाचता दिखाई दे रहा है शख्स कोई और नहीं बल्कि उत्तराखंड के निर्दलीय विधायक के घर में घुसकर फायरिंग करने वाला पूर्व भाजपा नेता कुवंर प्रणव सिंह चैंपियन हैं।

दरअसल, उत्तराखंड के खानपुर में रविवार 26 जनवरी को पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के बीच विवाद हो ।

फेसबुक पर वायरल वीडियो को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “हमला करने के बाद अपनी टीम के साथ हथियार लेकर नाचता हुआ एक बदमाश पूर्व विधायक भाजपा प्रणव सिंह चैंपियन जिसने दो दिन पहले अपनी गैंग के साथ निर्दलीय विधायक उमेश कुमार पर हमला किया था।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक :

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि पुराना है। 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की पड़ताल के लिया हमने गूगल पर खोजना शुरू किया। इस दौरान हमने वायरल वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल लेंस के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो First India News नामक यूट्यूब चैनल पर मिली, जिसे जुलाई 10, 2019 को अपलोड किया गया था।

उपरोक्त मिली जानकारी की पुष्टि के लिए हमने पर हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो अमर उजाला की वेबसाइट पर जुलाई 18, 2019 को छपे लेख में खबर मिली। लेख के मुताबिक वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2019 के दौरान का है।

लेख में बताया गया है कि हथियारों के साथ डांस करते हुए कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। उन्हें पार्टी से पहले ही निलंबित कर 20 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया गया था।

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2018 के दौरान का है। जिसे हालिया दिनों में भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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