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फैक्ट चेक: क्या अयोध्याधाम के 14 किलोमीटर के भीतर किसी भी SC, ST, OBC समाज के लोगों को चप्पल पहनने की नहीं है अनुमति, जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: क्या अयोध्याधाम के 14 किलोमीटर के भीतर किसी भी SC, ST, OBC समाज के लोगों को चप्पल पहनने की नहीं है अनुमति, जानें पूरा सच

 

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर के 14 किलोमीटर के दायरे में SC, ST- OBC समाज के लोगों को चप्पल पहनने की अनुमति नहीं है। फेसबुक पर वायरल पोस्ट शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “( योगी जी) अंध भक्तों राम मंदिर बन गया है,राम मंदिर के 14 किलोमीटर के भीतर कोई भी SC,ST,OBC वाला चप्पल पहनकर नहीं जा सकता,नंगे पांव जाओ,यही है राम राज्य.

 

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।  

 

फैक्ट चेक:

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल पोस्ट फर्जी है ऐसा किसी भी प्रकार का कोई आदेश नहीं दिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने गूगल पर कुछ संबंधित कीवर्ड्स के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें गूगल पर इस मामले पर कोई भी रिपोर्ट नहीं मिली जहां इस तथ्य की पुष्टि की गयी हो।

बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें इस मामले से संबंधित न तो कोई न्यूज़ रिपोर्ट मिली और न ही कोई अन्य सरकारी आदेश।

 

मामले की तह तक जाने के लिए हमने बारीकी से तथ्यों को खोजने का प्रयास किया। इसी क्रम में हमने अयोध्या में ‘श्री राम जन्म भूमि तीरथ क्षेत्र’ की वेबसाइट की सहायता से वहाँ के लोगों से संपर्क किया। जहां उन्होंने वायरल दावे के खंडन करते हुए इसे गलत बताया साथ ही बताया कि राम मंदिर में किसी भी प्रकार का कोई जातिवाद नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि राम मंदिर में तो कई कर्मचारी भी SC, ST और OBC समाज से हैं।

पड़ताल के दौरान हमने मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल दावा फर्जी है। जिस तरह किसी भी मंदिर के बाहर ही सभी लोग अपने चप्पल-जूते उतारते हैं वैसे ही राम मंदिर के बाहर ही सभी अपने जूते चप्पल उतारते हैं। फिर चाहे वो किसी भी समाज का हो।

 

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।

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