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कौन होता है ट्रेनी आईएएस, कितनी होती है पावर, क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं? यहाँ जानें सब कुछ

कौन होता है ट्रेनी आईएएस, कितनी होती है पावर, क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं? यहाँ जानें सब कुछ

महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं। अपने लक्ज़री सौक, पद के दुरुपयोग के साथ-साथ फर्जी सर्टिफिकेटों के बदौलत नौकरी पाने वाली यह ट्रेनी आईएएस चर्चा में आयी। दरअसल, उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रोबेशन पर रहते हुए अपनी पहली जॉइनिंग में ही  सरकारी आवास, गाड़ी व स्टाफ की अनुचित मांग की जिससे वह चर्चा में आयी।  ऐसे में आईये जानते हैं एक ट्रेनी आईएएस की कितनी होती है हनक और उसे किन-किन सुविधाओं का मिलता है लाभ-

बता दें कि आईएएस, आईआरएस, आईएफएस, आईपीएस जैसी सिविल सेवाओं का हिस्सा बनने के लिए देश और दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC CSE पास करना पड़ता है।

कौन होता है ट्रेनी आईएएस 

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) इस देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में एक है। इसे पास करने के लिए दो सालों की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें अधिकारियों को अनुशसान, कठिन हालातों में लड़ना, प्रशासन आदि के बारे में सिखाया जाता है। इसी ट्रेनिंग के पीरियड को प्रोबेशन या फिर ट्रेनिंग पीरियड कहा जाता है। इस ट्रेनिंग के बाद अधिकारियों को फील्ड पर पोस्टिंग दी जाती है। इस दौरान उनके रहने और खाने की पूरी जिम्मेदारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की होती है।

कितनी होती है सैलरी

ट्रेनिंग के दौरान सभी अधिकारियों को एक समान सैलरी दी जाती है। ट्रेनी आईएएस की सैलरी करीब 50-60 हजार रुपये मासिक तक होती है. कभी-कभी 70 हजार रुपये तक भी मिल जाते हैं. यह इन हैंड सैलरी है यानी सब डिडक्शन के बाद इतनी सैलरी उनके बैंक अकाउंट में क्रेडिट की जाती है। ट्रेनिंग के लोकेशन के हिसाब से सैलरी में कोई बदलाव नहीं होते हैं। हालांकि, इस ट्रेनिंग के दौरान अलग-अलग फेज होते हैं जिस हिसाब से सैलरी घटती या बढ़ती है।

क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं

ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा रहने-खाने की पूरी सुविधा दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान फील्ड पोस्टिंग पर अधिकारियों को टीए और डीए दिया जाता है। इस दौरान वे गेस्ट हाउस या फिर होटल का कमरा लेकर रह सकते हैं।

नहीं मिलती है घर, सिविल सर्वेंट और गाड़ी जैसी सुविधाएं 

ट्रेनिंग के दौरान किसी भी आईएएस अफसर को सरकारी आवास, गाड़ी, ड्राइवर, स्टाफ आदि की सुविधा नहीं मिलती है। इसके साथ ही उन्हें अलग केबिन की सुविधा भी नहीं दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान फील्ड पोस्टिंग मिलने पर वह सरकारी गेस्ट हाउस में ठहर सकते हैं या किसी होटल में रूम भी ले सकते हैं।

इन आरोपों में घिरी पूजा खेडकर- 

गौरतलब है कि पूजा खेडकर ने 2021 में यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास की थी। जिसमें उन्हें 841वीं रैंक मिली थी। इसके बाद उन्हें LBSNAA में ट्रेनिंग दी गयी और बाद में उन्हें जून 2024 में पुणे कलेक्टर ऑफिस में पहली नियुक्ति दी गयी। यह नियुक्ति भी ट्रेनिंग का ही हिस्सा थी।

पूजा खेडकर ने ट्रेनिंग के दौरान सरकारी आवास, स्टाफ, गाड़ी और ऑफिस में अलग केबिन की मांग रखी। अपने ट्रेनिंग के दौरान प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार किए गए एक ट्रांसपोर्टर को छोड़ने के लिए डीसीपी रैंक के अधिकारी पर दबाव बनाया था। उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती और महाराष्ट्र सरकार का लोगो लगाकर अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया।

पूजा खेडकर ने आईएएस बनने के लिए फेक सर्टिफिकेट्स लगाए उन्होंने यूपीएससी फॉर्म में खुद के ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर से होने का दावा किया। जबकि वह खुद भी करीब 17 करोड़ की मालकिन हैं. उनके नाम पर कई प्रॉपर्टी दर्ज हैं। उनके पास 17 लाख रुपये की घड़ी भी बताई जा रही है।

इसके साथ ही प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने विकलांगता श्रेणी के तहत यूपीएससी फॉर्म भरा था. उन्होंने दावा किया कि वह 40% दृष्टिबाधित हैं और किसी मानसिक बीमारी से भी जूझ रही थीं. लेकिन मेडिकल के लिए बुलाए जाने पर वह हर बार नदारद रहीं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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