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कर्नाटक चुनाव: बीजेपी का समान नागरिक संहिता का वादा, जानें क्या होता है यूनिफार्म सिविल कोड

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कर्नाटक चुनाव: बीजेपी का समान नागरिक संहिता का वादा, जानें क्या होता है यूनिफार्म सिविल कोड

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने सोमवार को एक बड़ा एलान किया है। भाजपा ने कर्नाटक की जनता से वादा किया है कि यहाँ वह अगर राज्य में अगर विधानसभा चुनावों में जीत कर राज्य की सत्ता पर काबिज होती है, तो वह राज्य में सामान नागरिक सहिंता लागू करेगी।

गौरतलब है कि भाजपा ने इससे पहले भी तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में सामान नागरिक सहिंता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की घोषणा की थी। इनमें गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश हैं। जिनमें से भाजपा ने दो राज्यों यानि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अपनी जीत दर्ज कराने में सफल रही है। गुजरात और उत्तराखंड हालांकि दोनों ही राज्यों में अभी तक इस कानून को लागू नहीं किया गया है।

लेकिन, अब भाजपा ने इसकी घोषणा कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में भी कर दी है। राज्य में 10 मई को चुनाव होने वाले हैं और बेंगलुरु में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी का घोषणापत्र जारी किया जिसमें यूसीसी का वादा किया गया है। फिलहाल बीजेपी की तरफ से 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए हर बड़ा फैसला लिया गया है, इसी के तहत एनआरसी और यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे को गर्माया जा रहा है।

जानिए क्या होता है यूनिफॉर्म सिविल कोड

समान नागरिक संहिता के तहत सभी धर्म, जाति और समुदायों के लिए सिर्फ एक ही कानून होता है। इसमें किसी के लिए भी कोई छूट नहीं दी जाएगी, सभी एक ही कानून के तहत आएंगे। यानी शादी हो या फिर संपत्ति का बंटवारा हो, सभी को यूनिफॉर्म सिविल कोड का पालन करना होगा। बीजेपी का कहना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होगी तब तक देश में लैंगिक समानता नहीं हो सकती है। संविधान में भी इसे लागू करने का पक्ष लिया गया है।

इस राज्य में पहले से लागू है यूसीसी 

बता दें कि अभी तक केवल गोवा में यूसीसी लागू है। यह भी इसलिए हो पाया क्योंकि 1961 में जब गोवा आज़ाद हुआ तो वहां पुर्तगीज़ सिविल कोड लागू था।  यूसीसी असल में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी और यहूदी धर्मों के अलग-अलग क़ानूनों की जगह एक समान क़ानून लाने की बात करता है। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि ‘सरकार भारत के संपूर्ण भूभाग में नागरिकों को समान नागरिक संहिता के तहत लाने का प्रयास करेगी.’ इसका मतलब ये है कि या तो राज्य या केंद्र सरकार विवाह, तलाक़, गोद लेने और विरासत के मामले में क़ानून ला सकती है।