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आज धूम -धाम से मनेगी जन्माष्टमी, जानें इस पर्व का महत्व और इतिहास

जन्माष्टमी का त्योहार हिन्दुओं के लिए बहुत ही उत्साह भरा पर्व है। जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रीकृष्ण दरअसल भगवान् विष्णु का अवतार है। इनका जन्म देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में मथुरा में हुआ था| कृष्णा ने मथुरावासियों को निर्दयी कंस के शासन से मुक्ति दिलाई। इतना ही नहीं महाभारत के युद्ध में पांडवों को जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी ।जन्माष्टमी एक ऐसा त्योहार है जिसे लोग पूरे उत्साह के साथ मनाते है। इस पवित्र दिन में भक्त मंदिरों में भगवान से प्रार्थना कर उन्हें भोग लगाते है। इस दिन लोग अपने घरों में बालगोपाल को दूध,शहद,पानी से अभिषेक कर नए वस्त्र भी पहनाते है।

जन्माष्टमी क्यों मानाई जाती है?

पौराणिक ग्रथों के अनुसार भगवान विष्णु इस दिन धरती पर भगवान श्री कृष्ण के रूप में आये थे। उनके जन्म दिन के दिन को को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

Shree-Bal-Gopal-Bhagvan .

कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी ?

जन्माष्टमी कई जगह अलग-अलग तरीक में मनाई जाती है। कई जगह इस दिन फूलों की होली भी खेली जाती है साथ में रंगों की भी होली खेली जाती है। जन्माष्टमी के दिन झाकियों के रूप में कही श्रीकृष्ण का मोहक अवतार देखने को मिलता है तो कही मंदिरो को इस दिन काफी धूम धाम से सजाया जाता है। और कई लोग इस दिन व्रत भी रखते है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को झूला भी झूलाया जाता है। मगर इस दिन कि चमक और गरज तो सबसे ज़्यादा मथुरा नगरी में होती है क्युकी ये श्रीकृष्ण की जन्मनगरी है।

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क्या है दही हांडी का महत्व?

ये तो हम सब जानते है कि कृष्णा को माखन दूध,दही काफी पसन्द था जिसकी वजह से वो पूरे गांव का माखन चोरी करके खा जाते थे। एक दिन उन्हें माखन चोरी करने से रोकने के लिए, उनकी मां यशोदा को उन्हें एक खंभे से बांधना पड़ा और इसी वजह से भगवान श्रीकृष्ण का नाम माखन चोर पड़ा।

वृन्दावन में महिलाओं ने मथे हुए माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया, जिससे की श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंच सके। इसके बाद कृष्णा ने एक योजना बनाई और दोस्तों के साथ मिलकर ऊंचाई में लटकाई गयी मटकी से दही और माखन चुरा लिया वही से प्रेरित होकर दही हांडी शुरू हुआ ।

भारत में भगवान के कृष्ण के 10 प्रसिद्ध मंदिर

पूरे भारत में वैसे तो जगह-जगह पर राधा-कृष्ण मंदिर हैं. लेकिन 10 मंदिर हैं जिनकी बड़ी मान्यता है. अहमदाबाद का जगन्नाथ मंदिर, वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर, उडीपी का श्रीकृष्ण मठ, नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर, जयपुर का गोविंद देव जी का मंदिर, इस्कॉन मंदिर, मथुरा का जुगल किशोर जी का मंदिर, केरल का गुरुवायूर मंदिर, तमिलनाडु का राजगोपाल स्वामी मंदिर, कर्नाटक का वेणुगोपाल स्वामी मंदिर.

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