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नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असम बाढ़ पीड़ितों और मणिपुर हिंसा प्रभावितों से की मुलाकात

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असम बाढ़ पीड़ितों और मणिपुर हिंसा प्रभावितों से की मुलाकात

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां एक तरफ रूस और ऑस्ट्रेलिया के तीन दिवसीय दौरे पर हैं वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी असम बाढ़ पीड़ितों व मणिपुर हिंसा प्रभावितों से मिलने के लिए असम व मणिपुर दौरे पर हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत सिलचर से की। यहां उन्होंने यूथ केयर सेंटर थलाई में राहत शिविरों का दौरा किया यह वह बाढ़ पीड़ितों से मिले।

गौरतलब है कि असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रविवार को जारी रिपोर्ट के राज्य में 28 जिलों के 27.74 लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। अब तक बाढ़, भूस्खलन और तूफान के कारण राज्य में कुल 78 मौतें हो चुकी हैं।

इस दौरान असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष भूपेन बोरा के नेतृत्व में एक टीम ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ज्ञापन सौंपकर उनसे संसद में असम में आने वाली बारहमासी बाढ़ का मुद्दा उठाने का आग्रह किया।

 

राहुल सुबह 10 बजे असम के सिलचर में थलाई इन यूथ केयर सेंटर में राहत शिविर का दौरा किया यहाँ वह करीब 1 घंटे रुके। इसके बाद वह करीब 12 बजे मणिपुर पहुंचे। यहाँ उन्होंने मणिपुर के चुराचांदपुर के तुइबोंग में एक राहत शिविर में लोगों से मुलाकात की।

 

गौरतलब है कि मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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