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Xiaomi के भारत कारोबार पर SFIO की नजर, ‘विस्तृत जांच’ की सिफारिश; क्या है पूरा मामला?

भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनी Xiaomi की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। Reuters की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के Serious Fraud Investigation Office (SFIO) ने Xiaomi के भारत में कारोबार में कथित अनियमितताओं और विदेशी निवेश कानूनों के अनुपालन को लेकर विस्तृत जांच की सिफारिश की है। यह सिफारिश एक सरकारी दस्तावेज में सामने आई है, जिसकी समीक्षा Reuters ने की है।

SFIO की प्रस्तावित जांच में फंड के लेन-देन, विदेशी निवेशकों और समूह की कंपनियों के वास्तविक लाभकारी स्वामित्व (beneficial ownership) और भारत में निवेश के लिए जरूरी सरकारी मंजूरियों की जांच शामिल है। हालांकि, यह सिफारिश अभी सरकार के संबंधित मंत्रालय की मंजूरी के इंतजार में है।

Xiaomi के फंड और निवेश की होगी जांच

SFIO ने अपनी सिफारिश में कहा है कि जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि Xiaomi और उससे जुड़ी कंपनियों में विदेशी निवेश से संबंधित नियमों का पालन हुआ या नहीं।

जांच में यह भी पता लगाने की बात कही गई है कि विदेशी निवेशकों या समूह की कंपनियों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभकारी स्वामित्व, नियंत्रण या नियंत्रण में किसी बदलाव की जानकारी सरकार को दी गई थी या नहीं और जहां जरूरी था, वहां उसकी मंजूरी ली गई थी या नहीं।

सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, SFIO ने इस मामले में विस्तृत जांच किए जाने की सिफारिश की है।

सरकार के पास है अंतिम फैसला

SFIO की सिफारिश के बाद अब मामले पर अंतिम फैसला संबंधित मंत्रालय को लेना है। Reuters से बात करने वाले कानून विशेषज्ञ मेघव गुप्ता के मुताबिक, ऐसे मामलों में मंत्रालय के फैसले के लिए कोई तय समयसीमा नहीं होती। मंत्रालय जांच की अनुमति दे सकता है, आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार न मिलने पर इसे रोक सकता है या दूसरे सरकारी विभागों को मामले की जांच करने के लिए कह सकता है।

SFIO भारत में कॉरपोरेट फ्रॉड से जुड़े मामलों की जांच करने वाली प्रमुख एजेंसियों में से एक है। इसे जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की शक्तियां भी हासिल हैं।

Xiaomi ने क्या कहा?

Reuters को दिए बयान में Xiaomi के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को SFIO की ओर से अब तक कोई नोटिस या आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

कंपनी ने कहा कि वह भारत के कानूनों को सर्वोच्च महत्व देती है और हर समय उनका पूरी तरह पालन करती है।

वहीं, SFIO और उसके मातृ मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से Reuters के सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया गया।

2020 के बाद कड़े हुए थे चीनी निवेश के नियम

भारत ने 2020 में चीन से होने वाले निवेश की जांच को कड़ा किया था। इसके तहत भारत में किसी चीनी इकाई के निवेश के लिए पहले से सरकारी मंजूरी लेना जरूरी किया गया था।

Reuters के मुताबिक, Xiaomi समेत कई कंपनियों ने उस समय कहा था कि इन नियमों के कारण निवेश और कारोबारी प्रक्रियाओं में देरी हुई।

इस साल भारत सरकार ने कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन सीमा पर तनाव कम करने और संबंधों को स्थिर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS Summit के लिए भारत आने की भी उम्मीद है।

पहले से कई मामलों का सामना कर रही है Xiaomi

SFIO की प्रस्तावित जांच Xiaomi के लिए भारत में एक और चुनौती बन सकती है। कंपनी पहले से ही वित्तीय अपराध जांच एजेंसी द्वारा उसके भारतीय बैंक खातों में करीब ₹55.51 अरब यानी लगभग ₹5,551 करोड़ की रकम फ्रीज किए जाने के मामले का सामना कर रही है। एजेंसी ने इस कार्रवाई को कथित अवैध रेमिटेंस से जोड़ा था, जबकि Xiaomi ने इन आरोपों से इनकार किया है।

भारत के स्मार्टफोन बाजार में भी Xiaomi की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम हुई है। Counterpoint Research के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी अब करीब 13% बाजार हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि पहले उसकी हिस्सेदारी 19% थी। 2025 में भारत में Xiaomi का राजस्व करीब 2.52 अरब डॉलर रहा, जो तीन साल पहले की तुलना में 40% कम है।

E-commerce बिक्री को लेकर भी जांच का दायरा

SFIO की प्रस्तावित जांच में Xiaomi की ऑनलाइन बिक्री से जुड़े कारोबारी मॉडल को भी शामिल किया गया है। Xiaomi भारत में Amazon और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए अपने उत्पाद बेचती है।

छोटे ऑफलाइन कारोबारियों ने लंबे समय से इन ई-कॉमर्स कंपनियों पर कुछ विक्रेताओं के साथ एक्सक्लूसिव समझौते करने के आरोप लगाए हैं। Amazon और Flipkart इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

2024 में भारत की एंटीट्रस्ट एजेंसी ने आरोप लगाया था कि Xiaomi समेत कुछ स्मार्टफोन कंपनियों ने Amazon और Flipkart के साथ मिलकर अपने उत्पादों की एक्सक्लूसिव ऑनलाइन लॉन्चिंग की थी, जो प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। Xiaomi ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की थी।

SFIO की प्रस्तावित जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या Xiaomi का भारतीय विक्रेताओं या लॉन्च पार्टनर्स पर वास्तविक नियंत्रण (de facto control) था, जबकि इन व्यवस्थाओं को स्वतंत्र कारोबारी संबंधों के तौर पर पेश किया गया।

जांच में कंपनी के वित्तीय बयानों और ऑडिटर रिपोर्ट की भी पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा मौजूदा और पूर्व निदेशकों, CFO और compliance अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

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One Comment

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