G7 से पहले पीएम मोदी का साइप्रस दौरा क्यों है महत्वपूर्ण ? न्यूज़मोबाइल फाउंडर सौरभ शुक्ला से जानिये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साइप्रस दौरा, G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, केवल एक साधारण पड़ाव नहीं बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा है। न्यूज़ मोबाइल के संस्थापक सौरभ शुक्ला ने इस दौरे को लेकर कहा कि “यह यात्रा सामाजिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ऐसे ही किसी देश की यात्रा नहीं करते, हर पड़ाव का एक व्यापक रणनीतिक सन्देश होता है।”
सौरभ शुक्ला के अनुसार, साइप्रस न केवल एक सामरिक दृष्टि से अहम देश है बल्कि वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत के लिए उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा, “साइप्रस लंबे समय से तुर्की के साथ संघर्षरत रहा है। साथ ही यह रणनीतिक रूप से ब्रिटिश फोर्सेज और पश्चिमी गठबंधन के लिए एक अहम बेस है।”
सौरभ शुक्ला ने बताया कि “वर्तमान में जब इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष गहराया है, तब साइप्रस में इज़राइली जहाजों की उपस्थिति दिखाती है कि वह एक ‘सीक्रेट सेफ ज़ोन’ की भूमिका निभा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का वहां जाना साफ संकेत देता है कि भारत उन देशों के साथ मजबूती से खड़ा है जो भारत के रणनीतिक हितों के साथ जुड़े हैं।” उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के बीच जो रणनीतिक ऐक्सिस बना है, वह ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद और अधिक सुदृढ़ हुआ है। “ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह साइप्रस जैसे देशों के साथ खड़ा हो जो वैश्विक मंचों पर भारत का समर्थन करते हैं।”
सौरभ शुक्ला ने यह भी बताया कि भारत ने इस दौरे के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ‘नॉर्दर्न साइप्रस’ को तुर्की का भाग नहीं मानता, और भारत साइप्रस की संप्रभुता का सम्मान करता है। “यह संदेश सिर्फ साइप्रस के लिए ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप और पश्चिम एशिया के लिए है, कि भारत कहां खड़ा है।”
मोदी की इस यात्रा को भारत की ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ यानी रणनीतिक स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखते हुए शुक्ला कहते हैं, “आज भारत रूस हो या अमेरिका, अपने टर्म्स पर डील करता है। यह वही भारत है जो अपनी शर्तों पर संबंध बनाता है। G7 में भी प्रधानमंत्री मोदी अगर मौजूद रहेंगे तो राष्ट्रपति ट्रंप (संभावित GOP उम्मीदवार) से भी खुलकर बात करेंगे।”
शुक्ला के अनुसार, “अमेरिका जानता है कि चीन के खिलाफ खड़ा होने के लिए उसे भारत जैसे विश्वसनीय साझेदार की जरूरत है। और भारत भी जानता है कि उसे कब, किसके साथ और किस मुद्दे पर खड़ा होना है।”





