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वक्फ संपत्ति क्या होती है और इसे घोषित करने की प्रक्रिया क्या है

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की मौजूदा शक्तियों में कटौती करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार जल्द ही वक्फ अधिनियम में बड़े बदलावों वाला संशोधन विधेयक संसद में पेश करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में वक्फ कानून से जुड़े लगभग 40 संशोधनों पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दे दी गई है। यह बिल संसद के आगामी सत्र में 5 अगस्त को पेश किया जा सकता है।

संशोधन बिल का उद्देश्य वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां देने वाले प्रावधानों को सीमित करना है। खासकर उस अधिकार को खत्म किया जा सकता है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है, बिना सबूत पेश किए।

क्या है वक्फ बोर्ड और कैसे करता है काम

वक्फ का मतलब है ‘अल्लाह के नाम पर समर्पित संपत्ति’। वक्फ बोर्ड का काम ऐसी संपत्तियों की देखरेख करना है जो धार्मिक, परोपकारी या सार्वजनिक उपयोग के लिए मानी जाती हैं। वर्तमान कानून के अनुसार, यदि वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दे तो मालिक को यह साबित करना पड़ता है कि संपत्ति उसकी निजी है। यही नहीं, वक्फ बोर्ड की इस घोषणा को सीधे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, बल्कि वक्फ ट्राइब्यूनल में ही अपील करनी होती है।

1995 के कानून ने दी थीं असीमित शक्तियां

वक्फ बोर्ड की शक्तियां 1995 के वक्फ एक्ट से बढ़ी थीं, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के कार्यकाल में पास हुआ था। इस कानून के तहत वक्फ बोर्ड को यह अधिकार मिल गया था कि वह किसी संपत्ति को पवित्र, धार्मिक या परोपकारी मानकर वक्फ घोषित कर सके। 2013 में हुए संशोधन ने इसे और मजबूत बना दिया।

अब तक सरकार से मिलते रहे हैं अनुदान

देश में एक केंद्रीय वक्फ बोर्ड और 32 राज्य वक्फ बोर्ड कार्यरत हैं। इन बोर्डों को सरकार की ओर से अनुदान भी मिलता रहा है। मोदी सरकार के दौरान भी वक्फ संपत्तियों पर स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं बनाने के लिए सरकार ने खर्च उठाया है।

संशोधन से क्या बदल सकता है

सरकार जिन प्रमुख बदलावों पर विचार कर रही है उनमें वक्फ संपत्तियों का अनिवार्य वेरिफिकेशन शामिल है। इसका उद्देश्य संपत्तियों के दुरुपयोग और अवैध कब्जे को रोकना है। देशभर में वक्फ बोर्ड के अंतर्गत करीब 8.7 लाख संपत्तियां और 9.4 लाख एकड़ भूमि आती है। अब वक्फ दावों पर बिना दस्तावेजी पुष्टि के अधिकार समाप्त हो सकते हैं और वक्फ बोर्ड को भी भूमि के दावे के लिए प्रमाण देने होंगे।

अगर यह संशोधन पास होता है, तो यह वक्फ एक्ट में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा और निजी संपत्तियों के मालिकों के लिए राहत का सबब बन सकता है।

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