नेपाल में बच्ची के रेस्क्यू का वायरल वीडियो निकला फर्जी, जांच में निकला AI जनरेटेड

काठमांडू: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद मलबे से 6 साल की बच्ची को जिंदा निकालने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि रसुवा जिले के तिमोरे गांव में सुरक्षा बलों ने तीन दिन तक मलबे में दबी रहने के बाद ‘मनीषा’ नाम की बच्ची को जिंदा बचाया।
हालांकि, वायरल वीडियो की जांच में सामने आया है कि यह वीडियो एआई से बनाया गया है। यानी वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें असली घटना की नहीं हैं।

असली घटना क्या है?
जांच में पता चला कि नेपाल में मलबे से मनीषा नाम की एक बच्ची को जिंदा बचाए जाने की घटना वास्तव में हुई थी। 28 अगस्त की मीडिया रिपोर्ट्स में भी बच्ची के मलबे से जिंदा निकाले जाने की जानकारी दी गई थी।
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो उस वास्तविक बचाव अभियान का वीडियो नहीं है। यानी बच्ची के बचाए जाने की घटना सच है, लेकिन उसे दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा वायरल वीडियो फर्जी है।
वीडियो में दिखीं कई गड़बड़ियां
वीडियो की बारीकी से जांच करने पर कई ऐसी चीजें नजर आईं, जो इसके असली होने पर सवाल खड़े करती हैं। बच्ची के चेहरे और बचावकर्मियों के हाथों पर दिखाई दे रही मिट्टी की बनावट सामान्य नहीं लगती।
वीडियो में सुरक्षा बल बच्ची के चेहरे से मिट्टी साफ करते दिखाई देते हैं, लेकिन मिट्टी जिस तरह अचानक और असामान्य तरीके से गायब होती दिखती है, वह संदिग्ध है। बच्ची के हाथ और शरीर की गतिविधियां भी स्वाभाविक नहीं लगतीं।
वीडियो के आगे के हिस्से में बच्ची को चार सुरक्षा कर्मियों के साथ बैठकर कथित तौर पर सूप पीते हुए दिखाया गया है। लोगों की स्थिति, कैमरे का एंगल और वीडियो की फ्रेमिंग भी वास्तविक बचाव अभियान जैसी नहीं लगती।
बाढ़ और भूस्खलन जैसी मुश्किल परिस्थितियों में बनाए गए किसी वास्तविक वीडियो में कैमरे की गतिविधि और दृश्य आमतौर पर अलग होते हैं। वायरल वीडियो में कैमरे की हरकत और तस्वीरों का संयोजन भी संदेह पैदा करता है।
AI जांच में भी फर्जी निकला वीडियो
वीडियो की प्रामाणिकता जांचने के लिए इसे Zhuque AI Detection Assistant नाम के एआई कंटेंट डिटेक्शन टूल से भी जांचा गया। जांच में वीडियो के एआई से बनाए जाने के संकेत मिले।

इससे साफ है कि नेपाल में मलबे से बच्ची को बचाने की वास्तविक घटना हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर उस घटना के नाम से वायरल किया जा रहा वीडियो एआई से बनाया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो को असली मानकर साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।





