विदेश

मध्य पूर्व में बढ़ा अमेरिकी सैन्य दबाव, 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात

मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ा दिया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत के बीच अमेरिका ने 50 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान इस इलाके में भेजे हैं।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में ही 50 से अधिक फाइटर जेट्स को मध्य पूर्व में तैनात किया गया है। इनमें F-35, F-22 और F-16 जैसे अत्याधुनिक विमान शामिल हैं। स्वतंत्र फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा से भी पुष्टि हुई है कि कई उन्नत सैन्य विमान एक साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़े हैं।

यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी है। दोनों पक्षों ने बातचीत में कुछ बुनियादी मुद्दों पर प्रगति की बात कही है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका का यह कदम बताता है कि वह कूटनीति के साथ-साथ दबाव की रणनीति भी बनाए हुए है।

सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने अपने नौसैनिक बेड़े की मौजूदगी भी बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। यह पोत पहले से मौजूद USS Abraham Lincoln और उसके साथ तैनात युद्धपोतों के साथ मिलकर काम करेगा।

अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि USS Gerald R. Ford और उसके साथ तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर इस समय अटलांटिक महासागर में हैं और उन्हें कैरेबियन से मोड़कर मध्य पूर्व की ओर भेजा गया है। इसके अलावा भी कई अमेरिकी युद्धपोत इस क्षेत्र में पहुंच रहे हैं।

ईरान की चेतावनी और सैन्य अभ्यास

इस बीच, ईरान की ओर से भी कड़ा संदेश सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने अमेरिका की सैन्य ताकत को लेकर बयान देते हुए कहा कि दुनिया की सबसे मजबूत सेना भी कभी-कभी इतनी जोर से जवाब पाती है कि संभल नहीं पाती।

उनके इस बयान के साथ ही ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास किया। यह वही इलाका है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है। अभ्यास के दौरान कुछ समय के लिए इस अहम समुद्री रास्ते पर आवाजाही सीमित कर दी गई, जिससे तनाव और बढ़ गया। यह हाल के हफ्तों में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के बाद पहली बार ऐसा कदम माना जा रहा है।

तनाव के बीच बातचीत जारी

हालांकि हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन बातचीत का रास्ता अब भी खुला है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि जिनेवा में हुई ताजा बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। ईरान ने कहा है कि वह आने वाले दो हफ्तों में अपने विस्तृत प्रस्ताव पेश करेगा।

इन वार्ताओं की अगुवाई अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर कर रहे हैं, जबकि ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यह पूरा विवाद 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ा है, जिसमें ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर सीमा तय की गई थी। लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद हालात फिर बिगड़ गए थे।

फिलहाल, एक ओर बातचीत जारी है तो दूसरी ओर सैन्य ताकत का प्रदर्शन भी हो रहा है, जिससे साफ है कि मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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