US Green Card Freeze: अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप की ग्रीन कार्ड नीति पर लगाई रोक, भारतीयों के लिए क्या बदलेगा?

US Green Card Freeze: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ग्रीन कार्ड नीति को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने 75 देशों के नागरिकों के ग्रीन कार्ड आवेदनों पर रोक लगाने वाली नीति को गैरकानूनी करार दिया है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमित मेहता ने कहा कि विदेश विभाग (State Department) ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह नीति लागू की थी।
हालांकि, इस फैसले का भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदकों पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत उन 75 देशों की सूची में शामिल नहीं था जिन पर यह रोक लागू की गई थी।
क्या था पूरा मामला?
ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में तत्कालीन विदेश मंत्री मार्को रुबियो के नेतृत्व में एक नई “पब्लिक चार्ज” (Public Charge) नीति लागू की थी। इसके तहत उन 75 देशों के नागरिकों के ग्रीन कार्ड आवेदनों की प्रक्रिया रोक दी गई थी, जिनके बारे में आशंका जताई गई थी कि वे भविष्य में सरकारी सहायता योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं।
इस सूची में नाइजीरिया, कोलंबिया, रूस और मिस्र जैसे कई देश शामिल थे।
अदालत ने क्या कहा?
अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमित मेहता ने अपने फैसले में कहा कि Immigration and Nationality Act (INA) के तहत व्यक्तिगत वीजा और ग्रीन कार्ड मामलों का फैसला कॉन्सुलर अधिकारियों को करना होता है। विदेश विभाग पूरे विभाग स्तर पर ऐसी व्यापक नीति लागू नहीं कर सकता।
अदालत ने माना कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति कानून के दायरे से बाहर थी और इसे लागू करना वैध नहीं था।
किसकी याचिका पर हुआ फैसला?
यह मामला ब्राजील के नागरिक न्यूटन डी मोरा गोम्स ने दायर किया था। उन्होंने EB-5 निवेशक वीजा कार्यक्रम के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन नई नीति के कारण उनकी प्रक्रिया रोक दी गई थी।
अदालत ने विदेश विभाग को निर्देश दिया कि उनका आवेदन कानून के अनुसार आगे बढ़ाया जाए।
किन आवेदकों पर पड़ा था असर?
इस नीति का सबसे अधिक असर फैमिली-आधारित (Family-Based) और कुछ रोजगार आधारित (Employment-Based) ग्रीन कार्ड आवेदनों पर पड़ा था। आलोचकों का कहना था कि यह नीति व्यक्तिगत पात्रता की जांच किए बिना ही हजारों आवेदनों को रोक रही थी।
भारतीय आवेदकों पर क्या असर?
फैसले में स्पष्ट किया गया है कि भारत उन 75 देशों में शामिल नहीं था, जिन पर यह ग्रीन कार्ड रोक लागू की गई थी। इसलिए भारतीय परिवार-आधारित और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड आवेदक इस नीति से सीधे प्रभावित नहीं हुए थे।
हालांकि, अमेरिका की आव्रजन नीतियों से जुड़े अन्य मामलों और लंबित कानूनी चुनौतियों पर भारतीय आवेदकों की नजर बनी रहेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल अदालत का आदेश इस विशेष मामले पर लागू हुआ है, लेकिन इसी नीति के खिलाफ अन्य मुकदमे भी अमेरिकी अदालतों में लंबित हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बड़े कानूनी फैसले सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी आव्रजन नीतियों पर भविष्य में होने वाली न्यायिक समीक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।






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