‘क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर किया’: सऊदी अरब पर हूती हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा

नई दिल्ली: भारत ने बुधवार को यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने सऊदी अरब की संप्रभु भूमि पर हुए हमलों और खास तौर पर नागरिक एवं आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले और बाब-अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने वाले ऐसे हमले स्वीकार्य नहीं हैं।
हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को दावा किया था कि उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब में तेल कंपनी सऊदी अरामको से जुड़े ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमलों के बाद कई तेल प्रतिष्ठानों और अन्य सुविधाओं में आग लग गई, जिसमें 73 लोग घायल हुए।
दक्षिणी सऊदी अरब में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इनमें जिजान रिफाइनरी भी शामिल है, जिसकी रोजाना करीब 4 लाख बैरल कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता है। ऐसे में इस इलाके पर हुए हमले सऊदी अरब के ऊर्जा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
बाब-अल-मंदेब क्यों है महत्वपूर्ण?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक अहम और संकरा समुद्री रास्ता है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद सऊदी अरब के लिए लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात की अहमियत और बढ़ गई है।
मार्च से जुलाई के बीच बाब-अल-मंदेब के रास्ते सऊदी अरब से होने वाला समुद्री कच्चे तेल का निर्यात 2025 की इसी अवधि के मुकाबले आठ गुना अधिक रहा।
भारत के लिए भी सऊदी अरब महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। रूस से तेल खरीद बढ़ने के बावजूद सऊदी अरब भारत के शीर्ष तीन ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
यमन में बढ़ा तनाव
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच हाल के दिनों में संघर्ष काफी बढ़ गया है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम के बाद यह तनाव सबसे गंभीर स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
हूतियों ने जुलाई में सऊदी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की घोषणा की थी और बाब-अल-मंदेब के पास यमन सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों की ओर भी आगे बढ़ना शुरू किया था।
सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की पाकिस्तान और तुर्किये ने भी निंदा की है। तुर्किये और सऊदी अरब ने हाल ही में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।





