TMC का चुनाव चिन्ह फ्रीज, राहुल गांधी-केजरीवाल ने EC पर उठाए सवाल; आखिर क्या है पूरा मामला?

तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और उसके पारंपरिक ‘घास पर दो फूल’ चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिलहाल दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुट इन चुनावों में अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
आखिर पूरा विवाद क्या है?
TMC के भीतर संगठन और पार्टी के नाम-चिन्ह पर नियंत्रण को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं। चुनाव आयोग के सामने एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों पक्ष खुद को असली पार्टी बताते हुए नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज सुनने के बाद कहा कि इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है। लेकिन आगामी उपचुनाव से पहले इतना समय उपलब्ध नहीं है।
चुनाव आयोग ने अभी क्या फैसला लिया?
आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को TMC का आधिकारिक नाम और उसका आरक्षित ‘घास पर दो फूल’ चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
आयोग के मुताबिक यह एक अंतरिम व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य दोनों गुटों को समान स्थिति में रखना और आगामी उपचुनाव के लिए चुनावी पहचान को स्पष्ट करना है। इसे पार्टी के नाम और चिन्ह पर अंतिम फैसला नहीं माना गया है।
दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन-तीन नए नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह बताने को कहा गया है। इसके बाद आयोग मौजूदा उपचुनाव के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान और चिन्ह आवंटित करेगा।
उपचुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर TMC के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने उम्मीदवार उतारे हैं।
अब इन चुनावों में दोनों गुट मूल TMC नाम और उसके आरक्षित चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें चुनाव आयोग की ओर से तय नई पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
राहुल गांधी और केजरीवाल ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आयोग और केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब TMC के मामलों में एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, चुनाव आयोग के आदेश में ऐसा निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस तरह चुनाव जीते जाएंगे।
अंतिम फैसला कब होगा?
अभी चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। मौजूदा आदेश केवल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है।
आयोग आगे दोनों पक्षों के दावों, दस्तावेजों और संगठनात्मक समर्थन की जांच करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार किसे मिलेगा।
फिलहाल इतना साफ है कि 6 अक्टूबर के उपचुनाव में दोनों TMC गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा।






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