छात्रों को प्रदर्शन से रोकने का फरमान पड़ा भारी! तमिलनाडु सरकार ने लिया यू-टर्न

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर जारी किए गए विवादित सर्कुलर को बुधवार को वापस ले लिया। इस सर्कुलर में कॉलेजों को निर्देश दिया गया था कि छात्रों को वामपंथी संगठनों और पार्टियों, जिसमें कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) भी शामिल है, के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोका जाए।
सर्कुलर सामने आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों ने विरोध जताया था। इसके बाद कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय ने बुधवार को इसे वापस लेने की जानकारी दी।
कॉलेजों को दिए गए थे निर्देश
कॉलेजिएट शिक्षा आयुक्त की ओर से शनिवार को जारी सर्कुलर में कॉलेज प्राचार्यों को कई विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई करने को कहा गया था। इसमें स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बनाने की बात कही गई थी।
कॉलेजों से छात्रों को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई थी। हालांकि, बुधवार को विभाग ने सर्कुलर वापस ले लिया।
SFI ने फैसले को बताया लोकतंत्र की जीत
सर्कुलर वापस लिए जाने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत बताया।
तमिलनाडु SFI की प्रमुख सी. मृदुला ने कहा कि यह सिर्फ SFI के प्रदर्शन की जीत नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत है। उन्होंने कहा कि छात्र एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगे और उनके अधिकारों को दबाने की कोशिश का विरोध करेंगे।
पीएमके प्रमुख ने भी सरकार पर उठाए सवाल
पट्टाली मक्कल काची (PMK) के प्रमुख अंबुमणि रामदास ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सामाजिक न्याय छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर इनसे जुड़े मुद्दों पर समस्या होती है तो छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार है।
रामदास ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब न हो। लेकिन सरकार छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से नहीं रोक सकती।
उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रदर्शन से रोकने की कोशिश उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
‘सरकार का दोहरा रवैया क्यों?’
रामदास ने स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन के उस प्रदर्शन में शामिल होने का भी जिक्र किया, जो चेन्नई में NEET के खिलाफ छात्रों ने किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ मंत्री खुद छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और दूसरी तरफ सरकार छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने का निर्देश देती है।
रामदास ने कहा कि भारत और दुनिया के कई देशों में छात्र आंदोलनों ने बड़े बदलाव लाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने सरकार से छात्रों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने की अनुमति देने की मांग की।





