डिजिटल अरेस्ट ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने और पीड़ितों को जल्द राहत दिलाने के लिए 13 अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को दिए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि देशभर में साइबर ठगी रोकने के लिए पहले से मौजूद व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
RBI को चार सप्ताह में SOP तैयार करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने RBI को चार सप्ताह के भीतर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने और सभी बैंकों को जारी करने का निर्देश दिया है। इसमें फर्जी या संदिग्ध बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) से निपटने, शिकायतों के समाधान और पीड़ितों के पैसे वापस दिलाने की प्रक्रिया तय की जाएगी।
राज्यों को साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर पूरी तरह शुरू करने और ई-ज़ीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्यवस्था लागू करने को कहा है। साथ ही साइबर ठगी से जुड़े मामलों में फ्रीज किए गए बैंक खातों का जल्द निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जागरूकता और पीड़ितों को राहत पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से कहा कि लोगों को डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से बचने के बारे में जागरूक किया जाए। साथ ही ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पीड़ितों को जल्द शिकायत दर्ज कराने और उनका पैसा वापस पाने में मदद मिल सके।
वीडियो और ऑडियो कॉल पर भी होगी समीक्षा
अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी में इस्तेमाल होने वाली ऑडियो और वीडियो कॉल सेवाओं पर समय आधारित कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस पर अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
साइबर ठगी के मामलों में आई कमी
सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 1.23 लाख से अधिक मामले सामने आए थे। यह संख्या 2025 में घटकर 58,249 रह गई, जबकि जून 2026 तक 16,377 मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में ठगी की रकम में भी कमी आई है।
फिलहाल सीबीआई कई बड़े डिजिटल अरेस्ट गिरोहों की जांच कर रही है, जिनमें सैकड़ों लोग ठगी का शिकार हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।




