नेपाल में बाढ़ से बिगड़े हालात, हजारों लापता; भारत ने भेजी 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री

काठमांडू: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,385 हो गई है, जबकि 5,130 लोग अभी भी लापता हैं। यह आंकड़े शुक्रवार सुबह 11 बजे जारी किए गए अपडेट में सामने आए।
सबसे ज्यादा मौतें चितवन में 364 हुई हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 228, नवलपरासी वेस्ट में 222, नुवाकोट में 199 और रसुवा में 185 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा गोरखा में 77, धादिंग में 70 और तनहूं में 38 लोगों की जान गई है। काठमांडू में इलाज के दौरान भी दो लोगों की मौत हुई।
13 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 13,676 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। विस्थापित लोगों के लिए 37 होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। इनमें नुवाकोट में सबसे ज्यादा 2,615 लोग रह रहे हैं। रसुवा में 775 और धादिंग में 295 लोगों को इन सेंटरों में रखा गया है।
राहत और बचाव अभियान में 21,022 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। इनमें नेपाल आर्मी के 8,844, नेपाल पुलिस के 7,975 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 जवान शामिल हैं।
प्रभावित इलाकों में सड़क और हवाई मार्ग से खाने-पीने की चीजों के साथ दूसरी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। नुवाकोट के देवीघाट में एक अस्थायी पुल भी तैयार कर उसे चालू कर दिया गया है, जिससे प्रभावित इलाकों में आवाजाही आसान हो सके।
नेपाल की मदद के लिए भारत ने बढ़ाया हाथ
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच भारत भी लगातार मदद पहुंचा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 26 अगस्त से अब तक भारत ने आठ विशेष उड़ानों के जरिए 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल भेजी है। भारत ने राहत सामग्री के अलावा 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है, जो बचाव, राहत और फॉरेंसिक ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं।
भारत की ओर से भेजी गई मदद में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयों के साथ सुरंग और कीचड़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष उपकरण, DNA प्रोफाइलिंग और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
नेपाल में बढ़ती तबाही के बीच राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत समेत कई एजेंसियां प्रभावित लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने में जुटी हुई हैं।





