US सांसद के FCRA बयान पर EIC सौरभ शुक्ला का बयान, भारत पर टिप्पणी को अमेरिकी चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखें

भारत में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधनों पर अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी के बीच Newsmobile के संस्थापक और Republic Media Network के चीफ कंसल्टिंग एडिटर सौरभ शुक्ला ने कहा कि इस बयान को अमेरिकी घरेलू राजनीति के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि इसे अमेरिका की आधिकारिक नीति माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में मिडटर्म चुनाव 100 दिनों से भी कम समय दूर हैं और ऐसे समय में कई सांसदों के बयान घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं।
भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है
सौरभ शुक्ला ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश है, जहां ईसाई समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा है और उसे संविधान के तहत समान अधिकार तथा धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था सभी धर्मों का सम्मान करती है और किसी भी समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
FCRA पर भारत को कानून बनाने का अधिकार
FCRA संशोधनों पर अपनी राय रखते हुए शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में नियम बनाना भारत का संप्रभु अधिकार है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए विदेशी वित्तपोषण पर नियम बनाते हैं, उसी तरह भारत भी ऐसा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उनके अनुसार, प्रस्तावित FCRA ढांचा किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं है।
भारत-अमेरिका संबंधों को एक बयान से नहीं आंकना चाहिए
सौरभ शुक्ला ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध कई क्षेत्रों में फैली मजबूत रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। ऐसे में किसी एक सांसद की टिप्पणी को दोनों देशों के व्यापक रिश्तों का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार मजबूत हुए हैं।
राजनयिक स्तर पर हो सकती है बातचीत
उन्होंने सुझाव दिया कि वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारी अमेरिकी सांसद से संवाद कर भारत की वास्तविक स्थिति और जमीनी तथ्यों से उन्हें अवगत करा सकते हैं।
उनका मानना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान राजनीतिक बयानबाजी के बजाय राजनयिक संवाद के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अफवाहों से बचने की अपील
सौरभ शुक्ला ने चर्चों पर सरकारी नियंत्रण जैसी आशंकाओं को लेकर फैलाए जा रहे दावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के दावे समुदायों के बीच अनावश्यक भय और भ्रम पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा और संरक्षण की लंबी परंपरा रही है और किसी भी चिंता का समाधान तथ्यों तथा संवाद के आधार पर किया जाना चाहिए।





