ताज़ा खबरेंभारत

Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे में मौतों का आंकड़ा 7 पहुंचा, मालिक हरिराम राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान दूसरे दिन भी जारी है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। NDRF, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मलबा हटाकर किसी और व्यक्ति के फंसे होने की तलाश कर रही हैं।

हादसे के बाद से फरार चल रहे बिल्डिंग के मालिक हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की कई टीमों ने राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी के बाद इसे दबोचा है।

इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर सात हो गई है। वहीं, मलबे से सुरक्षित निकाले गए 12 लोगों का इलाज जारी है और राहत-बचाव कार्य अभी भी चल रहा है।

मालिक के परिवार के खिलाफ भी LOC

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मालिक के परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ भी Lookout Circular जारी किया गया है। जांच में अगर परिवार के किसी अन्य सदस्य की भूमिका सामने आती है, तो वह देश से बाहर न जा सके, इसके लिए यह कदम उठाया गया है।

पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इमारत में चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्य को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

मलबे में अब भी किसी के फंसे होने की आशंका

NDRF की टीमें लगातार मलबा हटा रही हैं। रात में भी बचाव अभियान जारी रहा। टीमों ने Life Detector और दूसरे उपकरणों की मदद से मलबे के अंदर संभावित लोगों की तलाश की।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा के मुताबिक, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति फंसा है या नहीं। एक मजदूर के अब भी लापता होने की संभावना जताई गई है।

स्थानीय लोगों और छात्रों ने भी बचाव अभियान की शुरुआत में मलबा हटाने में मदद की थी।

आसपास की इमारतों पर भी खतरा

हादसे के बाद आसपास की इमारतों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। एक पड़ोसी इमारत को असुरक्षित पाया गया है और उसे गिराने की तैयारी की जा रही है। आसपास की इमारतों को सहारा देने के लिए लोहे के जैक भी लगाए गए हैं।

प्रशासन ने आसपास के लोगों और छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद सख्ती

सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक पुरानी इमारत अचानक ढह गई थी। यह इमारत छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए थे।

रेस्क्यू ऑपरेशन में दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और पुलिस की टीमें शामिल थीं। AIIMS ट्रॉमा सेंटर में हादसे से जुड़े 10 मरीज लाए गए, जिनमें 5 को मृत अवस्था में लाया गया था। बाद में एक घायल की इलाज के दौरान मौत हो गई।

इमारत में अवैध निर्माण की जांच

MCD की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्य निकेतन की इस संपत्ति का निर्माण 1990 के दशक में हुआ था। करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इमारत में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिलें थीं।

अधिकारी के अनुसार, इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं था। बेसमेंट में किया गया निर्माण भी कथित तौर पर अनधिकृत था।

MCD इस बात की भी जांच कर रहा है कि इमारत में निर्माण या बदलाव के कारण उसकी संरचना कमजोर हुई थी या नहीं। पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है।

पांचवीं मंजिल भी जांच के घेरे में

MCD अधिकारी के मुताबिक, नियमों के तहत इस इमारत में पांचवीं मंजिल की अनुमति नहीं थी। वहीं, मौजूदा इमारत के बेसमेंट में बदलाव को भी खतरनाक बताया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी थी कि इस तरह के निर्माण को समय रहते रोका जाता। अब इस मामले में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सत्य निकेतन कैसे बना छात्रों का हब?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन पहले एक पुनर्वास कॉलोनी थी। समय के साथ यहां छात्रों के लिए PG और किराये के कमरों की मांग बढ़ती गई।

इसी मांग को पूरा करने के लिए कई संपत्तियों में अतिरिक्त कमरे और मंजिलें जोड़े जाने की बात सामने आई है। MCD अब ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

MCD ने साफ किया है कि चार मंजिल से ज्यादा की अवैध इमारतों को सील करने का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button