Delhi Building Collapse: बिना मंजूरी और Fire NOC के चल रहे थे PG, सत्य निकेतन हादसे ने खोली पोल

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत के बाद इलाके में चल रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं था।
MCD के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में भी बिना अनुमति निर्माण किया गया था। इतना ही नहीं, इस तरह के कई PG और बहुमंजिला भवनों में जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होने की बात सामने आई है।
55 गज के प्लॉट पर बनी थी इमारत
MCD की रिपोर्ट के अनुसार, P-14 सत्य निकेतन की इमारत करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। इसमें बेसमेंट के साथ ग्राउंड फ्लोर और चार मंजिलें थीं। इमारत का निर्माण 1990 के दशक में हुआ था।
MCD अधिकारी के मुताबिक, इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा रिकॉर्ड में नहीं मिला। बेसमेंट में किया गया निर्माण भी अनधिकृत था। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा इमारत के बेसमेंट में इस तरह के बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह खतरनाक है।
पांचवीं मंजिल भी नियमों के खिलाफ
अधिकारियों के मुताबिक, इमारत में पांचवीं मंजिल की अनुमति भी नहीं थी। इसके बावजूद सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में समय के साथ कई पुरानी इमारतों में अतिरिक्त कमरे और मंजिलें जोड़ दी गईं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास होने के कारण सत्य निकेतन छात्रों के लिए बड़ा PG और किराये का केंद्र बन गया है। छात्रों की बढ़ती मांग के साथ यहां पुरानी इमारतों को कई मंजिलों और छोटे कमरों वाले PG में बदलने का चलन बढ़ा।
PG के पास Fire NOC भी नहीं
मामले में Fire NOC को लेकर भी सवाल उठे हैं। नियमों के मुताबिक, 9 मीटर से ज्यादा ऊंची और 20 से अधिक छात्रों को रखने वाली इमारतों के लिए Fire NOC जरूरी है।
एक MCD अधिकारी के अनुसार, हादसे वाली इमारत के पास भी Fire NOC नहीं था। अधिकारी ने कहा कि इलाके में इसी तरह के कई भवनों में नियमों की अनदेखी की गई है।
पहले भी हो चुका है हादसा
सत्य निकेतन में इमारत गिरने का यह पहला मामला नहीं है। अप्रैल 2022 में भी यहां एक इमारत गिर गई थी। उस हादसे में छह लोग मलबे में फंसे थे और दो लोगों की मौत हुई थी।
इसके बावजूद इलाके में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल बने रहे।
छात्रों की मजबूरी भी बड़ी वजह
शहरी नियोजन विशेषज्ञ जगदीश ममगैन के मुताबिक, दिल्ली में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल की कमी के कारण सस्ते PG की मांग बनी रहती है। इसी मांग को पूरा करने के लिए कई जगहों पर छोटे कमरों और अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया जाता है।
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में किराये की मांग ने पुराने और कम ऊंचाई वाले इलाकों को घने छात्र आवास क्षेत्र में बदल दिया है। अब सत्य निकेतन हादसे के बाद इन इलाकों में भवन और Fire Safety नियमों के पालन को लेकर सख्ती की मांग बढ़ गई है।





