भारत में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ बिल पेश, 25 देशों में पहले से लागू है यह कानून

नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2025 – भारतीय संसद में हाल ही में एक महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किया गया है जो कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ का अधिकार प्रदान करता है. लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले द्वारा प्रस्तुत इस बिल का उद्देश्य कर्मचारियों को कार्य के घंटों के बाद डिजिटल माध्यमों से दूर रहने का कानूनी अधिकार देना है.
डिजिटल युग में बढ़ती समस्या
आधुनिक स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के दौर में कर्मचारियों के लिए कार्य से स्वयं को पूरी तरह अलग कर पाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है. आमतौर पर कर्मचारियों की यह शिकायत रहती है कि उन्हें कार्यालय छोड़ने और घर पहुंचने के बाद भी कार्यालयीन जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के फोन कॉल और ई-मेल का जवाब देना अनिवार्य हो जाता है. इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है.
वैश्विक स्तर पर देखें तो यह कोई नई अवधारणा नहीं है. विश्व के अनेक देशों में यह नियम पहले से ही प्रभावी है.
25 से अधिक देशों में प्रभावी है यह व्यवस्था
वैश्विक स्तर पर कम से कम 25 देशों में कर्मचारियों के लिए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ संबंधी नियम लागू किए जा चुके हैं. यूरोपीय महाद्वीप, लैटिन अमेरिकी देशों, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और अफ्रीका के विभिन्न राष्ट्रों ने ऐसे विधान पारित किए हैं जो संगठनों के कर्मचारियों को कार्यालय समय से पूर्व और पश्चात की समय-सीमाओं का अनुपालन करने के लिए बाध्य करते हैं.
कुछ देशों में ये नियम समस्त कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होते हैं, जबकि कुछ राष्ट्रों में ये विशेष रूप से टेलीवर्कर्स, दूरस्थ कार्यकर्ताओं, गृह-आधारित कर्मचारियों या डिजिटल नोमैड्स के लिए विशिष्ट हैं.
फ्रांस ने दिखाई राह
विश्व में सर्वप्रथम फ्रांस ने अपने कर्मचारियों को ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ का अधिकार प्रदान किया. फ्रांस ने 2017 में इस ऐतिहासिक कानून को अंगीकार किया, जो वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बना.
यूरोपीय देशों में कानूनी ढांचा
- बेल्जियम ने 2022 में नियम लागू किया जिसके अंतर्गत 20 या इससे अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों से लिखित डिस्कनेक्शन पॉलिसी तैयार करना अनिवार्य किया गया.
- इटली ने 2017 में स्मार्ट-वर्किंग व्यवस्था के लिए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ विधान बनाया. इसके तहत समस्त दूरस्थ कार्य अनुबंधों में विश्राम और डिजिटल डिस्कनेक्शन सुनिश्चित करने की विधियां स्पष्ट करना आवश्यक किया गया.
- स्पेन ने 2018 से 2020 के मध्य इस व्यवस्था को क्रियान्वित किया. पुर्तगाल में 2021 में लागू किया गया कानून राष्ट्रीय स्तर पर सबसे कड़े कानूनों में से एक माना जाता है.
- ग्रीस के 2021 के विधानों ने टेलीवर्कर्स को कार्यालय समय के पश्चात और अवकाश के दिनों में डिस्कनेक्ट होने का अधिकार दिया.
- लक्जमबर्ग ने 2023 में आंतरिक या सामूहिक रूप से तय डिस्कनेक्शन नियम लागू किए. स्लोवाकिया ने 2021 में अपने श्रम संहिता में संशोधन करके टेलीवर्कर्स को कार्यालय समय के बाद डिजिटल संपर्क से संरक्षण प्रदान किया.
- क्रोएशिया ने 2023 में राइट-टू-डिस्कनेक्ट संबंधी नियम जोड़े. स्लोवेनिया ने 2024 में विश्राम, अस्वस्थता और अवकाश के समय डिस्कनेक्ट होने के अधिकार के लिए कानून निर्मित किया.
- फिनलैंड और नीदरलैंड्स के बीच बाध्यकारी प्रभाव वाले अनुबंध विद्यमान हैं जिनमें दूरस्थ कार्यकर्ताओं के लिए डिस्कनेक्शन संरक्षण सम्मिलित है. जर्मनी सार्वजनिक क्षेत्र और कुछ विशिष्ट उद्योगों में कानूनी तौर पर प्रवर्तनीय डिस्कनेक्शन नियमों के साथ बाध्यकारी नियम क्रियान्वित करता है.
लैटिन अमेरिका और अन्य महाद्वीप
- अर्जेंटीना में 2021, चिली में 2023, और मेक्सिको के संघीय श्रम कानून में 2021 में इसे समाविष्ट किया गया.
- इसके अतिरिक्त, ब्राजील में 2022, कोलंबिया में 2021, और पेरू में 2023 में संबंधित विधान लाए गए.
एशिया-प्रशांत और अफ्रीका
ऑस्ट्रेलिया में 2024, फिलीपींस में 2018, कजाकिस्तान और थाईलैंड में 2023, केन्या में 2022, और मोजाम्बिक में 2022 में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ से संबंधित कानून प्रभावी किए गए.
भारत में प्रस्तुत यह विधेयक कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जो वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है.





