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राज्यसभा ने पास किया ‘ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल 2026’, न्यायिक व्यवस्था में आएंगे बड़े बदलाव

इस नए बिल के पास होने से देश की ट्रिब्यूनल प्रणाली और नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनेगी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्च सदन में चर्चा के दौरान कहा कि देश की प्रगति के लिए कानूनी बुनियादी ढांचा भी उतना ही जरूरी है।

संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा ने मंगलवार को ‘ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026’ (Tribunals Reforms Bill, 2026) को मंजूरी दे दी है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य देश भर के ट्रिब्यूनलों के कामकाज, प्रशासन और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार लाना है।

राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग का गठन

इस विधेयक के तहत एक स्वतंत्र और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने के लिए ‘राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग’ (NTC) के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। यह आयोग ट्रिब्यूनल प्रणाली के लिए एक संरचित संस्थागत ढांचा तैयार करेगा, जिससे नियुक्तियों और सेवा शर्तों में एकरूपता आएगी।

कानूनी बुनियादी ढांचा देश के लिए जरूरी: अर्जुन राम मेघवाल

सदन में चर्चा के दौरान जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जिस तरह सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट और बंदरगाहों का विकास जरूरी है, वैसे ही देश की प्रगति के लिए मजबूत कानूनी बुनियादी ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अदालतों पर मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने और मामलों के त्वरित निपटान के लिए एक कुशल ट्रिब्यूनल प्रणाली जरूरी है।

मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि संविधान के अनुच्छेद 323A और 323B के तहत ट्रिब्यूनलों का संवैधानिक आधार दिया गया है। स्वतंत्रता से पहले 1941 में स्थापित ‘इन्कम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल’ (ITAT) को ट्रिब्यूनलों की जननी माना जाता है। यह बिल अदालतों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि कराधान, कंपनी कानून, पर्यावरण और बौद्धिक संपदा जैसे विशेष क्षेत्रों में विशेषज्ञ न्याय प्रदान करने के लिए है।

इससे पहले लोकसभा ने भी सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच इस बिल को पास कर दिया था।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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