‘राहुल गांधी VIP नहीं हैं’, मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट के सामने सभी लोग बराबर हैं। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के वकील को जल्द सुनवाई के लिए तय प्रक्रिया का पालन करने को कहा।
दरअसल, पूर्व सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि कोर्ट की रजिस्ट्री राहुल गांधी को वीआईपी की तरह देख रही है। उन्होंने कहा कि पहले कोर्ट के निर्देश के बावजूद राहुल गांधी की अपील सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हमारे सामने सभी बराबर हैं।” पीठ ने शिकायतकर्ता को जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा और भरोसा दिलाया कि आवेदन पर विचार किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जो उन्होंने दिसंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर की थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारत की करीब 2,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है।
इसी बयान को लेकर श्रीवास्तव ने लखनऊ की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना की छवि और मनोबल को नुकसान पहुंचाने वाला है।
लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन मई 2025 में हाईकोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट में पहले भी हुई थी सुनवाई
राहुल गांधी की याचिका पर पहले न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की थी। 4 अगस्त 2025 को कोर्ट ने मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
पीठ ने राहुल गांधी से उनके इस दावे का आधार पूछा था कि चीन ने भारतीय क्षेत्र के 2,000 वर्ग किलोमीटर हिस्से पर कब्जा किया है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सीमा विवाद जैसे मुद्दे संसद में उठाए जाने चाहिए।
राहुल गांधी की ओर से कहा गया था कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे और ऐसे मुद्दों पर जनता का ध्यान खींचना चाहते थे।
‘मेरे मामले को दूसरे केस से क्यों जोड़ा गया?’
बुधवार की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील गौरव भाटिया ने कहा कि उनके मामले को ‘द वायर’ से जुड़े एक अलग मानहानि मामले के साथ जोड़कर सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से दोनों मामलों को अलग करने और पहले दिए गए आदेश के मुताबिक सुनवाई की तारीख तय करने की मांग की।
इस पर पीठ ने उन्हें जल्द सुनवाई और मामले को अलग करने के लिए उपलब्ध प्रक्रिया अपनाने को कहा।
राहुल गांधी ने याचिका में क्या कहा?
राहुल गांधी की याचिका में दावा किया गया है कि वह पहले से ही भाषणों से जुड़े 20 से ज्यादा मामलों का सामना कर रहे हैं। याचिका में इन मामलों को कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के तौर पर बताया गया है।
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 223(1) का भी हवाला दिया गया है। इसमें मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अपराध का संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनने से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लेख है।
वहीं, शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने 2022 में जानबूझकर गलत और भ्रामक बयान दिया था, जिसका उद्देश्य भारतीय सेना का मनोबल गिराना था। उन्होंने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर सेना के आधिकारिक बयान का भी हवाला दिया है।





