PM मोदी का बड़ा दावा, मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत ने 7.7% ग्रोथ रेट बरकरार रखी

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के Monsoon Session 2026 की शुरुआत से पहले भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संकट के बावजूद भारत ने 7.7% की GDP Growth दर्ज की है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की आंतरिक मजबूती और देशवासियों की मेहनत का प्रमाण है।
Middle East संकट के बीच भी मजबूत रही भारतीय अर्थव्यवस्था
PM मोदी ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों ने भारत जैसे देशों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और कई रसायनों के आयात पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने 7.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखी, जो देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
‘दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था‘
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विकास दर यह साबित करती है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की क्षमता, युवाओं के उत्साह और विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का परिणाम है।
संसद में सार्थक चर्चा की अपील
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से मानसून सत्र को सकारात्मक और उत्पादक बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में तथ्यों और तर्कों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि हंगामे के जरिए।
उन्होंने कहा, “जहां तथ्य और मजबूत तर्क हों, वहां तूफान खड़ा करने की जरूरत नहीं होती।”
युवाओं की आकांक्षाओं का रखा जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा नई उम्मीदों और बड़े सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में संसद की जिम्मेदारी है कि वह उनकी आकांक्षाओं को दिशा देने का काम करे।
उन्होंने कहा कि संसद में हर आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और हर विचार को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
Monsoon Session पर रहेंगी सभी की नजर
20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र कई अहम विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों को लेकर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार जहां अपने प्रमुख विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
ऐसे में इस बार का मानसून सत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।






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