SCO समिट में PM मोदी ने आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश, क्षेत्रीय सहयोग के लिए रखे 10 सुझाव

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को मजबूत करने के लिए 10 अहम सुझाव दिए। PM मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से मिलकर सख्त कार्रवाई करने की अपील की।
SCO की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर PM मोदी ने संगठन के तीन मुख्य स्तंभों—सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर—को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साझा लक्ष्यों को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए उन्हें जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।
आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की अपील
PM मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इसके पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने वाले नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। PM मोदी ने साफ कहा कि किसी भी देश द्वारा समर्थित आतंकवाद को रणनीतिक हथियार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अफगानिस्तान और वैश्विक शांति पर जोर
प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए लगातार विकास सहायता और मानवीय मदद जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
PM मोदी ने चेतावनी दी कि युद्ध और संघर्ष वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने ड्रग्स की तस्करी, संगठित अपराध और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए SCO देशों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।
कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर
PM मोदी ने क्षेत्र में मजबूत और सभी देशों के लिए उपयोगी कनेक्टिविटी नेटवर्क बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी कनेक्टिविटी परियोजना में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने व्यापार और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए कस्टम प्रक्रिया को सरल करने, डिजिटल दस्तावेजों के इस्तेमाल और बेहतर लॉजिस्टिक्स सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।
युवाओं और किसानों को जोड़ने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि SCO का सहयोग आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए युवाओं, उद्यमियों और किसानों को संगठन की गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने युवा, वैज्ञानिक, कारोबारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने की भी अपील की। PM मोदी ने SCO स्टार्टअप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया।
उन्होंने SCO सभ्यता संवाद मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा और कहा कि इसका पहला सत्र भारत में आयोजित किया जा सकता है।
कई देशों के नेताओं से की मुलाकात
SCO समिट के दौरान PM मोदी ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय मुलाकात की। उन्होंने टोगो के राष्ट्रपति फॉरे एसोजिमना ग्नासिंगबे, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन और लाओस के राष्ट्रपति थोंगलोन सिसोलिथ से बातचीत की।
इस दौरान भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। PM मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी अनौपचारिक बातचीत की।
भारत के लिए फायदेमंद रहा दौरा
PM मोदी ने कहा कि SCO समिट के दौरान हुई उनकी विभिन्न बैठकों से भारत को ठोस लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और वहां के लोगों को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद दिया।
इससे पहले PM मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया और भारतीय दल का उत्साह बढ़ाया।
SCO में फिलहाल 10 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं—भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान।00000




