संसद का मानसून सत्र खत्म: पहले लोकसभा, फिर राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को हंगामे और विपक्ष-सरकार के बीच जारी गतिरोध के साथ समाप्त हो गया। सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर बीजेपी अध्यक्ष और सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए जांच का भरोसा दिया।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर खरगे ने क्या कहा?
खरगे ने राज्यसभा में बताया कि उन्होंने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। उनके अनुसार, कार्यक्रम के बाद उसी स्थान पर कथित तौर पर हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
खरगे ने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में इस तरह की घटना को कैसे उचित माना जा सकता है। उन्होंने इसे संविधान और समानता के मूल्यों से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
खरगे ने बाद में मांग की कि कथित शुद्धिकरण में शामिल लोगों के खिलाफ अस्पृश्यता कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
जेपी नड्डा ने की निंदा, जांच का भरोसा
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि खरगे की भावनाएं आहत हुई हैं और इस पूरे मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की रैली के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण समारोह आयोजित किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम खरगे की दलित पहचान से जुड़ा हुआ था और इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ा।
बीजेपी ने हालांकि इन आरोपों से दूरी बनाई और घटना में पार्टी की भूमिका से इनकार किया।
मॉनसून सत्र में और किन मुद्दों पर हुआ हंगामा?
संसद का मॉनसून सत्र छात्र विरोध प्रदर्शनों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के लिए भी चर्चा में रहा। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करता रहा।
अमित शाह ने बुधवार को छात्र विरोध के मुद्दे पर चर्चा की पेशकश की थी, जिसे विपक्ष ने स्वीकार नहीं किया। विपक्ष का कहना था कि वह चर्चा से पहले सरकार से जवाब चाहता है।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों को गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जिसके साथ ही संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया।
अमित शाह की चर्चा की पेशकश पर सहमति नहीं बनी
सत्र के अंतिम दिनों में गतिरोध खत्म करने की कोशिश के तहत अमित शाह ने बुधवार को छात्र विरोध और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर चर्चा की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष स्पीकर को पत्र देकर चर्चा शुरू कर सकता है।
अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखकर सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की जानकारी दी थी।
हालांकि, विपक्ष ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे आखिरी समय में की गई कोशिश बताया और कहा कि विपक्ष गृह मंत्री का भाषण नहीं, बल्कि अपने सवालों के जवाब चाहता है।
छात्र विरोध बना सबसे बड़ा मुद्दा
पूरे मानसून सत्र के दौरान छात्र विरोध का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण रहा। विपक्ष ने NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
विपक्ष की मांग थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस मामले पर सदन में बयान दें। सरकार का कहना रहा कि वह मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन चर्चा के तरीके और दायरे को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई।
अंतिम दिन भी संसद परिसर में प्रदर्शन
सत्र के अंतिम दिन विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि सरकार ने पूरे सत्र के दौरान विपक्ष की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर छात्र मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया और अमित शाह के चर्चा के प्रस्ताव का बचाव किया।
FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया
गतिरोध के बीच लोकसभा ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे।
विपक्ष ने कहा कि वह समिति में शामिल होकर विधेयक का विरोध जारी रखेगा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर सरकार पर निशाना साधा, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि JPC में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
इस तरह संसद का मानसून सत्र छात्र विरोध और सरकार-विपक्ष के बीच लगातार बने गतिरोध के बीच समाप्त हुआ। सत्र के अंतिम दिन भी अमित शाह का सदन में छात्र विरोध पर बयान नहीं हो सका।





