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एक देश, अनेक स्वाद: मकर संक्रांति पर राज्यों की थाली में क्या है खास?

आज मकर संक्रांति है, देशभर में सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही आस्था, परंपरा और स्वाद का महापर्व मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति भारत के उन चुनिंदा त्योहारों में शामिल है, जो हर राज्य में अलग नाम, अलग रस्मों और खास पारंपरिक व्यंजनों के साथ मनाया जाता है। इस पर्व का सीधा संबंध प्रकृति, फसल और स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है, इसलिए हर क्षेत्र में ऐसे पकवान बनाए जाते हैं, जो सर्दी के मौसम में शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देते हैं।

उत्तर भारत में मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। तिल के लड्डू, गुड़ की चिक्की और खिचड़ी इस दिन खास तौर पर बनाई जाती है। तिल और गुड़ को समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इनका सेवन शुभ माना जाता है।

महाराष्ट्र में यह त्योहार “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला” के संदेश के साथ मनाया जाता है। यहां तिल और गुड़ से बने तिलगुल बांटे जाते हैं, जो आपसी रिश्तों में मिठास का प्रतीक हैं। इसके साथ ही पारंपरिक पूरणपोली भी मकर संक्रांति की थाली की शान होती है।

गुजरात में मकर संक्रांति स्वाद और पतंगों का अनोखा संगम है। यहां उंधियू, जलेबी और तिल की चिक्की खास तौर पर बनाई जाती है। पतंगबाजी के बीच इन व्यंजनों का आनंद लेना गुजरात की पहचान बन चुका है।

राजस्थान में सर्द मौसम को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा से भरपूर भोजन किया जाता है। तिल के लड्डू, घेवर, बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से परोसी जाती है, जो ठंड में शरीर को ताकत देती है।

पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति का उत्सव लोहड़ी के साथ जुड़ा हुआ है। यहां मक्के की रोटी, सरसों का साग, गजक और रेवड़ी पारंपरिक स्वाद का हिस्सा होते हैं, जो नई फसल की खुशी को दर्शाते हैं।

तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। सूर्य देव को समर्पित इस पर्व पर सक्कराई पोंगल (मीठा) और वेन पोंगल (नमकीन) मुख्य प्रसाद के रूप में बनाए जाते हैं, जो कृतज्ञता और समृद्धि का प्रतीक हैं।

कर्नाटक में एल्लु बेला, जिसमें तिल, गुड़ और नारियल का मिश्रण होता है, एक-दूसरे को शुभकामनाओं के साथ बांटा जाता है। यह परंपरा दोस्ती और सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

केरल में मकर संक्रांति के अवसर पर पायसम और अवियल जैसे सादे लेकिन स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, जो वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

कुल मिलाकर, मकर संक्रांति 2026 सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की विविधता, परंपराओं और पारंपरिक स्वादों का उत्सव है, जहां हर राज्य अपनी अनूठी पहचान और संस्कृति के साथ इस दिन को खास बनाता है।

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