क्यों नेपाल ने आपदा में विदेशी रेस्क्यू टीमों से मदद लेने से किया साफ इनकार? जानिए असली वजह

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, इस बीच नेपाल सरकार ने भारत समेत कई देशों के राहत और बचाव दलों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां इस आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं।
बाढ़ से भारी तबाही और लापता लोगों की तलाश
नेपाल में बुधवार से जारी मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 475 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। चीन सीमा के पास स्थित गांवों और कस्बों में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। बचावकर्मियों को कीचड़ और मलबे में तलाश अभियान चलाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
विदेशी मदद क्यों ठुकराई गई?
भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों ने नेपाल को राहत और बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। लेकिन नेपाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सुरक्षा एजेंसियां खुद खोज और बचाव अभियान चला रही हैं, इसलिए फिलहाल किसी विदेशी मदद की आवश्यकता नहीं है।
इसके पीछे मुख्य वजह साल 2015 का गोरखा भूकंप है। उस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दलों के आने से समन्वय (कोऑर्डिनेशन) की गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। काठमांडू एयरपोर्ट पर राहत उड़ानों का भारी जाम लग गया था और विदेशी टीमों को उतरने में कई दिन लग गए थे।
भारत और अन्य देशों की मदद जारी
भले ही नेपाल ने विदेशी बचाव दलों को आने से मना कर दिया हो, लेकिन भारत ने मानवीय सहायता के रूप में भारतीय वायुसेना (IAF) के दो विमानों के जरिए 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी है। इस सामग्री में तंबू, कंबल, दवाइयां, भोजन और जनरेटर शामिल हैं। इसके अलावा, नेपाल वित्तीय मदद और प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से एक-द्वार प्रणाली (one-door mechanism) के जरिए सहयोग स्वीकार कर रहा है।




