Meta पर कसेगा शिकंजा, बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने अश्लील विज्ञापनों और CSAM मामलों पर शुरू की जांच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक रील हटाने और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों के विवाद के बाद भारत सरकार और एनसीपीसीआर (NCPCR) ने मेटा (Meta) के खिलाफ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

बाल अधिकारों की रक्षा करने वाले राष्ट्रीय आयोग (NCPCR) ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSEAM) और विज्ञापनों के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कंपनी के जवाब की समीक्षा करने के बाद अब इस मामले में औपचारिक जांच बिठाने का बड़ा फैसला किया है।
क्या है पूरा मामला?
बीबीसी आई (BBC Eye) की एक मीडिया रिपोर्ट में मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) वाले विज्ञापनों के चलने का खुलासा हुआ था। इस गंभीर खुलासे के बाद एनसीपीसीआर ने मेटा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। मेटा द्वारा अपना जवाब दाखिल करने के बाद, आयोग ने तथ्यों की गहराई से जांच करने के लिए यह इंक्वायरी शुरू की है।
भारत दौरे पर आ रही है मेटा की ग्लोबल टीम
इस बीच, भारत सरकार भी मेटा के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। आईटी सचिव एस कृष्णन ने जानकारी दी है कि मेटा की ग्लोबल टीम 5 और 6 अगस्त को भारत दौरे पर आ रही है। सरकार इस बैठक में सीएसएएम को रोकने में नाकामी और प्रमुख हस्तियों के अकाउंट्स के साथ की गई छेड़छाड़ जैसे गंभीर मुद्दे मजबूती से उठाएगी।
पीएम मोदी की रील हटाने पर बढ़ा विवाद
विवाद तब और गहरा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक फेसबुक रील— जिसमें वह देश के युवाओं को संबोधित कर रहे थे और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा कर रहे थे— प्लेटफॉर्म पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।
संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इस घटना के लिए माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा कंपनी को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी सुरक्षा कवच) संरक्षण वापस ले लिया जाएगा।





