मिशन सुदर्शन चक्र को मिली रफ्तार, अगले एक साल में तीन नए मिसाइल इंटरसेप्टर का होगा परीक्षण

भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत डीआरडीओ (DRDO) अगले 12 महीनों में तीन नए लंबी दूरी के मिसाइल इंटरसेप्टर का परीक्षण करेगा। इन इंटरसेप्टर की मारक क्षमता 120 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होगी।
डीआरडीओ ने गुरुवार को ओडिशा तट के पास कुशा प्रोजेक्ट के तहत एम-1 इंटरसेप्टर का पहला सफल परीक्षण किया। इसकी मारक क्षमता 120 किलोमीटर है। इसके बाद 150 किलोमीटर रेंज वाले एम-2 और 400 किलोमीटर रेंज वाले एम-3 इंटरसेप्टर का भी परीक्षण किया जाएगा।
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DRDO successfully conducted the maiden flight-test of the indigenous ‘Kusha’ Long-Range Surface-to-Air Missile from APJ Abdul Kalam Island, Odisha, successfully intercepting a high-speed, high-altitude aerial target. The advanced system is capable of engaging a wide spectrum of… pic.twitter.com/BjJo74PcAx
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) July 23, 2026
h3>क्या है प्रोजेक्ट कुशा?
प्रोजेक्ट कुशा को मई 2022 में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से मंजूरी मिली थी। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस परियोजना को और तेज़ी से आगे बढ़ाया गया। इस दौरान पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी, जिन्हें भारत की आकाश तीर एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।
भारत की सुरक्षा होगी और मजबूत
प्रोजेक्ट कुशा के तहत विकसित किए जा रहे एम-1, एम-2 और एम-3 इंटरसेप्टर लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं। इनका उद्देश्य दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करना है।
ये नई मिसाइलें भारत की मौजूदा 80 किलोमीटर रेंज वाली एयर डिफेंस प्रणाली और रूस से मिले एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बीच की क्षमता को मजबूत करेंगी। इससे देश की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा और प्रभावी होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने महसूस किया कि लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली की जरूरत है, ताकि सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की बेहतर सुरक्षा की जा सके। इसी वजह से प्रोजेक्ट कुशा को सरकार ने प्राथमिकता दी है।
इस परियोजना में सिर्फ मिसाइल इंटरसेप्टर ही नहीं, बल्कि ऐसे आधुनिक रडार भी शामिल होंगे जो सीमा पार से दागी गई मिसाइलों का समय रहते पता लगाकर उन्हें रोकने में मदद करेंगे।
रूस से मिलेगा पांचवां एस-400 सिस्टम
भारत इस साल नवंबर में रूस से पांचवां एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा भारत रूस से पांच और एस-400 सिस्टम खरीदने की तैयारी भी कर रहा है। इसके साथ ही 280 से अधिक एस-400 मिसाइलें भी भारतीय रक्षा प्रणाली का हिस्सा बनेंगी।
सरकार का मानना है कि भविष्य में मिसाइल और ड्रोन आधारित युद्ध की संभावना बढ़ रही है। ऐसे में भारत अपनी हवाई सुरक्षा को लगातार मजबूत करने पर जोर दे रहा है।





