‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी पर लखनऊ पुलिस का बड़ा एक्शन, शुरू हुआ ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर ठगी, खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाले फ्रॉड के खिलाफ ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य ठगी की शिकायत मिलते ही तेजी से कार्रवाई करना, ठगी की रकम को रोकना, पीड़ितों का पैसा वापस दिलाना, आरोपियों को गिरफ्तार करना और लोगों को जागरूक करना है।
अभियान की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को दी गई है। पुलिस ठगी की शिकायत मिलने के बाद तकनीकी सबूत, बैंक लेनदेन और पैसों के लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों और उनके नेटवर्क का भी पता लगा रही है।
पुलिस बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर संदिग्ध लेनदेन को रोकने या रकम पर रोक लगाने का काम कर रही है, ताकि ठगी की रकम आगे ट्रांसफर न हो सके और पीड़ितों का पैसा वापस दिलाया जा सके।
पुलिस के मुताबिक, 1 से 20 अगस्त के बीच साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों में करीब 2.40 करोड़ रुपये की रकम होल्ड या लियन कराई गई। इसी दौरान वित्तीय हस्तक्षेप के जरिए 16.97 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए। वहीं, साइबर पुलिस स्टेशन की मदद से 24 लाख रुपये पीड़ितों को वापस कराए गए।
दरअसल, ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी के मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, ट्राई या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद फर्जी केस, गिरफ्तारी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप लगाकर वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
पुलिस ने साफ किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती और न ही गिरफ्तारी रोकने या केस खत्म करने के लिए पैसे मांग सकती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
जागरूकता अभियान के तहत यूपी पुलिस अभिनेता नाना पाटेकर की विशेष जागरूकता फिल्म भी लोगों तक पहुंचा रही है। इसमें डिजिटल अरेस्ट ठगी के तरीके और इससे बचने के उपाय बताए गए हैं। पुलिस ने लोगों से इस फिल्म को खासकर बुजुर्ग परिवार के सदस्यों तक पहुंचाने की अपील की है।
एडीसीपी क्राइम किरण यादव, आईपीएस ने कहा कि ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ के तहत ठगी की पहचान से लेकर पैसों की जांच, रकम की बरामदगी, आरोपियों की गिरफ्तारी और लोगों को जागरूक करने तक पूरी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से कहा है कि अगर कोई ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दे तो घबराएं नहीं। कॉल करने वाले की पहचान की स्वतंत्र रूप से जांच करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का संदेश है—सतर्क रहें, पहचान की खुद जांच करें और साइबर ठगी की सूचना तुरंत 1930 पर दें।





