जस्टिस बीआर गवई बनेंगे भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने नियुक्ति को दी मंजूरी

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) होंगे। राष्ट्रपति ने मंगलवार को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी। वह 14 मई 2025 को पदभार संभालेंगे। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस संजीव खन्ना, 13 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनकी जगह जस्टिस गवई लेंगे। कानून मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
जस्टिस गवई देश के दूसरे दलित समुदाय से आने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। इससे पहले, जस्टिस केजी बालाकृष्णन 2007 में इस पद पर आसीन हुए थे। जस्टिस गवई का कार्यकाल करीब छह महीने का होगा और वह 23 दिसंबर 2025 को 65 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होंगे।
जस्टिस गवई के कुछ प्रमुख फैसले
राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई (2022): जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 30 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद दोषियों की रिहाई का आदेश दिया था, यह मानते हुए कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने समय पर निर्णय नहीं लिया था।
वणियार आरक्षण को असंवैधानिक करार (2022): सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार द्वारा वणियार समुदाय को दिए गए विशेष आरक्षण को भेदभावपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया।
नोटबंदी को वैध ठहराना (2023): जस्टिस गवई ने 4:1 बहुमत के साथ 2016 की नोटबंदी को संवैधानिक करार दिया था, यह कहते हुए कि यह निर्णय केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच समुचित परामर्श के बाद लिया गया था।
ईडी निदेशक के कार्यकाल का विस्तार अवैध घोषित (2023): उनकी पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के सेवा विस्तार को अवैध ठहराया था और उन्हें 31 जुलाई 2023 तक पद छोड़ने का आदेश दिया था।
बुलडोजर कार्रवाई पर रोक (2024): जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपित या दोषी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को ध्वस्त करना असंवैधानिक है और किसी भी विध्वंस की कार्रवाई उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘मोदी सरनेम’ मानहानि केस में राहत दी थी।
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत दी।
दिल्ली शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के. कविता को जमानत प्रदान की।
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उनके पिता, दिवंगत आरएस गवई, एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार व केरल के राज्यपाल रह चुके हैं। जस्टिस गवई ने 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में अपना न्यायिक करियर शुरू किया और 2005 में स्थायी जज नियुक्त हुए। उन्होंने मुंबई, नागपुर, औरंगाबाद और पणजी पीठों में अपनी सेवाएं दीं।
जस्टिस गवई देश के चुनिंदा न्यायाधीशों में शामिल हैं जिन्होंने नोटबंदी, बुलडोजर कार्रवाई, और इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर ऐतिहासिक फैसलों में भूमिका निभाई है।





