देश भर के मंदिरों में आधी रात को धूमधाम से मनाया गया नंदलाल का जन्मोत्सव

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व देश भर में अत्यंत उल्लास के साथ मनाया गया। मथुरा, प्रयागराज, दिल्ली, और उज्जैन सहित देश के विभिन्न शहरों में मंदिरों में कान्हा के जन्मोत्सव की धूम देखने को मिली। मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया और हर तरफ भगवान श्री कृष्ण के जयकारों की गूंज सुनाई दी।
उत्तर प्रदेश: मथुरा, वृंदावन, कानपुर और प्रयागराज में भव्य आयोजन
उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। मथुरा और वृंदावन में श्री कृष्ण जन्मभूमि और प्रेम मंदिर को सुंदर रोशनी से सजाया गया था, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
#WATCH | Mathura, Uttar Pradesh: The birth of Lord Krishna is being celebrated at the Shri Krishna Janmabhoomi Temple on the occasion of Krishna Janmashtami. pic.twitter.com/LJfbp3LEcr
— ANI (@ANI) September 4, 2026
#WATCH | Uttar Pradesh: Prem Mandir in Vrindavan is illuminated with beautiful lights on the occasion of Shri Krishna Janmashtami. pic.twitter.com/aB7TAYVRO5
— ANI (@ANI) September 4, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर मंदिर में आधी रात को पूजा-अर्चना की। वहीं, प्रयागराज के इस्कॉन मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण को वृंदावन से मंगाई गई रत्न जड़ित विशेष पोशाक पहनाई गई।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष और मनमोहक झांकी सजाई गई। 5/2 कृष्णा नगर निवासी शशि भाल अवस्थी और मयंक भाल अवस्थी (अवस्थी परिवार) द्वारा तैयार की गई यह झांकी भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं की खूबसूरत यात्रा को दर्शाती है।

इस झांकी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
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कारागार — श्री कृष्ण जन्म: झांकी की शुरुआत राजा कंस के कारागार में श्री कृष्ण के जन्म से होती है, जिसमें वासुदेव जी, देवकी जी और नवजात कृष्ण को दर्शाया गया है।
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वासुदेव जी द्वारा कृष्ण को गोकुल ले जाना: वासुदेव जी द्वारा यमुना पार करके कृष्ण को गोकुल ले जाने की यात्रा को भी इसमें दिखाया गया है, जो कृष्ण के गोकुल जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
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गोकुल का ग्रामीण जीवन: घरों, ग्रामीणों, पशुओं, रास्तों और हरियाली के साथ एक संपूर्ण लघु गोकुल ग्राम बनाया गया है, जो कृष्ण के बचपन के पारंपरिक ग्रामीण माहौल को जीवंत करता है।
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पारंपरिक मिट्टी के खिलौने: झांकी में पारंपरिक और हस्तनिर्मित स्पर्श जोड़ने के लिए मिट्टी के खिलौनों और आकृतियों का उपयोग किया गया है।
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वुड पाउडर से रोड और घास: लघु परिदृश्य को प्राकृतिक और यथार्थवादी रूप देने के लिए वुड पाउडर (लकड़ी के बुरादे) का उपयोग करके सड़कें और घास के क्षेत्र बनाए गए हैं।
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गोधन एवं ग्रामीण संस्कृति: गोकुल में गौ-सेवा और पशुपालन संस्कृति के महत्व को दर्शाने के लिए गायों और अन्य ग्रामीण तत्वों को शामिल किया गया है।
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बाल कृष्ण की लीलाएँ: झांकी में बाल कृष्ण की चंचल लीलाओं, उनकी बचपन की गतिविधियों और गोकुल के आनंदमय वातावरण को चित्रित किया गया है।
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कृष्ण–राधा का सुंदर केंद्र: सजा हुआ मुख्य कृष्ण-राधा का प्रदर्शन इस झांकी के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा।
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हैंडमेड मिनिएचर लैंडस्केप: एक संपूर्ण लघु दुनिया बनाने के लिए पेड़ों, पौधों, हरियाली, घरों और अनगिनत सूक्ष्म विवरणों को बहुत करीने से सजाया गया था।
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रचनात्मक और हस्तनिर्मित कार्य: इस झांकी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें रेडीमेड सजावट के बजाय व्यापक रूप से हस्तनिर्मित और बारीकी से काम किया गया।
दिल्ली: इस्कॉन मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
राजधानी दिल्ली के इस्कॉन मंदिरों में जन्माष्टमी पर भारी जोश और उत्साह दिखा। पूर्वी कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर आधी रात की पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया और आशीर्वाद लिया।
मध्य प्रदेश: भोपाल, नागपुर और उज्जैन में उत्सव
मध्य प्रदेश के भोपाल में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने आवास पर दही-हांडी उत्सव में भाग लिया। नागपुर के बड़कस चौक पर दही-हांडी फोड़ने के लिए गोविंदाओं ने पूरी ताकत लगाई और डीजे की धुन पर जमकर जश्न मनाया। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण ने 11 वर्ष की आयु में 64 दिनों में शिक्षा ग्रहण की थी, जहाँ बारिश के बावजूद दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
राजस्थान: जयपुर के इस्कॉन मंदिर में पूजा
राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरवर स्थित इस्कॉन मंदिर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधि-विधान के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
झारखंड: रांची के मोरहाबादी मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम
झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में श्री कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यहाँ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भजनों की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।





