ISRO के निजीकरण की खबरों पर अंतरिक्ष एजेंसी ने तोड़ी चुप्पी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने साफ किया है कि एजेंसी के निजीकरण का कोई भी प्रस्ताव नहीं है और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ने के बावजूद इसकी केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी।
इसरो के निजीकरण की खबरों पर स्पष्टीकरण
यह स्पष्टीकरण मीडिया रिपोर्ट्स और भविष्य में इसरो की भूमिका को लेकर उठी चिंताओं के बाद आया है, जहां कर्मचारी संघों ने प्रस्तावित सुधारों पर अधिक पारदर्शिता की मांग की थी। IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने कहा कि रिपोर्टों ने इसरो की स्थिति के बारे में भ्रामक प्रभाव पैदा किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इसरो की भूमिका कम नहीं हो रही है और यह भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की रीढ़ बना रहेगा।
अंतरिक्ष सुधार और निजी कंपनियों की भूमिका
साल 2020 में शुरू किए गए सुधारों के तहत, IN-SPACe निजी कंपनियों की बड़ी भागीदारी को सुविधा और अनुमति देता है, जबकि न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) परिपक्व तकनीकों के कमर्शियलाइजेशन में सहायता करता है। निजी उद्योग को स्थापित लॉन्च वाहनों, उपग्रहों और अन्य प्रणालियों के निर्माण और उन्हें बड़े पैमाने पर तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है। इससे इसरो को उन्नत अनुसंधान, वैज्ञानिक मिशनों, रणनीतिक कार्यक्रमों और नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति मिलेगी।
इसरो के आगामी अंतरिक्ष मिशन
ISRO फ्रंटियर रिसर्च, मानव अंतरिक्ष उड़ान, डीप-स्पेस और ग्रहीय मिशनों और रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताओं का नेतृत्व करना जारी रखेगा। भविष्य के प्रमुख कार्यक्रमों में 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने का मिशन शामिल है।





