GISAT-1 का कमबैक, 4 सितंबर को लॉन्च होगा ISRO का नया एडवांस सैटेलाइट EOS-05

GISAT का मतलब ‘जियो इमेजिंग सैटेलाइट’ (Geo Imaging Satellite) है। इसे भारत को अंतरिक्ष से धरती की लगातार और पैनी नजर देने के लिए तैयार किया गया है। इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
भूस्थैतिक कक्षा की ताकत
पारंपरिक सैटेलाइट लो-अर्थ ऑर्बिट में चक्कर लगाते हैं और किसी निश्चित जगह के ऊपर से गुजरने पर ही तस्वीर लेते हैं। इसके विपरीत भूस्थैतिक कक्षा (Geostationary Orbit) में स्थापित यह सैटेलाइट भूमध्य रेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के घूमने की गति के साथ ही चक्कर लगाएगा। इससे यह पृथ्वी की सतह के सापेक्ष लगभग स्थिर नजर आएगा और भारतीय उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रख सकेगा।
यह सैटेलाइट हर 30 मिनट में भारत और आसपास के क्षेत्रों की रियल-टाइम तस्वीरें भेजने में सक्षम होगा। वहीं, किसी खास और प्राथमिकता वाले टारगेट के लिए यह हर 5 मिनट में भी तस्वीर ले सकेगा।
भारत के लिए क्यों है अहम?
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आपदा प्रबंधन: चक्रवात, बाढ़ या जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं का तुरंत पता लगाने और उनकी पल-पल की बदलती स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
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कृषि और पर्यावरण: कृषि की स्थिति का आकलन करने तथा जमीन और पानी से जुड़े बदलावों को ट्रैक करने के लिए यह बेहद उपयोगी है।
सुरक्षा: सामरिक और सुरक्षा नजरिए से यह सैटेलाइट रणनीतिक क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने की ताकत देगा।
2021 की असफलता के बाद वापसी
यह मिशन ISRO के लिए भावनात्मक और रणनीतिक दोनों रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। अगस्त 2021 में GSLV-F10 लॉन्च के दौरान तकनीकी खराबी आने के कारण मूल GISAT-1 मिशन अपने तय orbit तक नहीं पहुंच पाया था। अब पांच साल बाद EOS-05 के रूप में इस कॉन्सेप्ट की दोबारा वापसी हुई है, जो भारत को अंतरिक्ष में एक शक्तिशाली नई आंख प्रदान करेगा।





