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ईरान के युद्धपोत को कोच्चि में शरण क्यों मिली? संसद में जयशंकर ने दिया जवाब

New Delhi: विदेश मंत्री S. Jaishankar ने संसद में कहा कि भारत ने एक ईरानी नौसैनिक जहाज़ को Kochi बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मानवीय आधार पर दी थी और यह फैसला बिल्कुल सही था।

उन्होंने बताया कि जहाज़ में तकनीकी खराबी आने के बाद ईरान की ओर से भारत से मदद मांगी गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए जहाज़ को आवश्यक तकनीकी जांच और लॉजिस्टिक सहायता के लिए अनुमति दी गई।

‘IRIS Lavan’ जहाज़ ने मांगी थी मदद

विदेश मंत्री के अनुसार ईरान के नौसैनिक जहाज़ IRIS Lavan ने क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र में तकनीकी खराबी की सूचना दी थी। इसके बाद 28 फरवरी को ईरान की ओर से भारत से डॉकिंग की अनुमति मांगी गई।

भारत ने 1 मार्च को इसकी अनुमति दी और यह जहाज़ 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा। जहाज़ के करीब 183 नाविक फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।

ईरान ने जताया भारत का आभार

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत के इस मानवीय कदम के लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भी धन्यवाद व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल जरूरत के समय सहायता देना था और यह पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय था।

अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में लिया था हिस्सा

बताया गया कि यह जहाज़ फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित MILAN 2026 Naval Exercise और International Fleet Review में शामिल हुआ था। तकनीकी समस्या की जांच पूरी होने तक यह जहाज़ कोच्चि में ही लंगर डाले रहेगा।

युद्ध के बीच बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। यह संघर्ष ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई के बाद और गंभीर हो गया है।

भारत सरकार का कहना है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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