IRGC का दावा: 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले, 6 महीने तक युद्ध जारी रख सकता है ईरान

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Iran ने बड़ा दावा किया है। देश की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का कहना है कि ईरान United States और Israel के साथ कम से कम छह महीने तक ‘तीव्र युद्ध’ जारी रखने की क्षमता रखता है।
आईआरजीसी के प्रवक्ता Ali Mohammad Naini ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में अमेरिका और इज़राइल से जुड़े 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है।
मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ा टकराव
हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच टकराव तेजी से बढ़ा है।
मिसाइल हमले, नौसैनिक झड़पें और सीमा पार सैन्य कार्रवाई ने पूरे मध्य-पूर्व को गंभीर संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ेगा।
बढ़ते हताहत और अस्थिर होती स्थिति
संघर्ष के चलते भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार:
- ईरान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है
- Lebanon और इज़राइल में भी कई लोगों के मारे जाने की खबर है
राजधानी Tehran पर लगातार हमलों के कारण हजारों लोग सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर चुके हैं।
इसी बीच देश में राजनीतिक अनिश्चितता भी बढ़ गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर
यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। Strait of Hormuz के पास मिसाइल हमलों की घटनाओं के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
सुरक्षा जोखिमों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले मार्गों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
दुनिया की बढ़ती चिंता
बढ़ते तनाव के बीच दुनिया भर के देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो मध्य-पूर्व की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।





