“पड़ोसी देश के रूप में भारत निभाता रहेगा अपनी जिम्मेदारी”: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

वियनतियाने, लाओ पीडीआर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे जहां उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की. प्रधानमंत्री मोदी ने तूफान मिल्टन के कारण हुई जनहानि पर सचिव ब्लिंकन को अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.
19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सबसे पहले, मैं “टाइफून यागी” से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. इस कठिन समय में, हमने ऑपरेशन सद्भाव के माध्यम से मानवीय सहायता प्रदान की है.”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “भारत ने हमेशा ASEAN की एकता और केंद्रीयता का समर्थन किया है. ASEAN भारत के इंडो-पैसिफिक विजन और क्वाड सहयोग के केंद्र में भी है. भारत की “इंडो-पैसिफिक महासागरों की पहल” और “इंडो-पैसिफिक पर आसियान आउटलुक” के बीच गहरी समानताएं हैं. एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक पूरे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है. दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के हित में है.”
पड़ोसी देश के रूप में भारत निभाता रहेगा अपनी जिम्मेदारी: PM Modi
“हम म्यांमार की स्थिति पर ASEAN के दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं. हम पांच सूत्री सहमति का भी समर्थन करते हैं. साथ ही, हमारा मानना है कि मानवीय सहायता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र की बहाली के लिए भी उचित कदम उठाए जाने चाहिए. हमारा मानना है कि इसके लिए म्यांमार को शामिल किया जाना चाहिए, अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए. पड़ोसी देश के रूप में भारत अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा.”
19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का सबसे ज्यादा नकारात्मक असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है. हर कोई चाहता है कि यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल हो. मैं बुद्ध की धरती से आता हूं और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है. समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता. संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना जरूरी है. मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देनी होगी. विश्वबधु का दायित्व निभाते हुए भारत इस दिशा में हरसंभव योगदान देता रहेगा.”





