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नेपाल में बाढ़ की तबाही, भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री और दवाइयां, PM मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताया समर्थन

नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तिब्बत सीमा के पास आए फ्लैश फ्लड ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। हादसे में अब तक कम से कम 8 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 105 भारतीयों समेत 400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने बचाव अभियान तेज कर दिया है।

10 टन राहत सामग्री और दवाइयां रवाना

भारत सरकार ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। भारतीय वायुसेना (IAF) के सी-130जे (C-130J) विमान के जरिए यह राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा रही है।

इस राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय (temporary shelters), कंबल, स्वच्छता किट (hygiene kits), सोलर लैंप और जीवन रक्षक दवाइयां शामिल हैं, जो आपदा पीड़ितों के लिए बेहद जरूरी हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारत इस संकट की घड़ी में नेपाल और उसके लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

भारत संकट की घड़ी में साथ

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं।

इसके साथ ही, भारत सरकार ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता प्रदान करने की पेशकश की है, ताकि आपदा से प्रभावित लोगों की मदद की जा सके।

नेपाल PMO ने कहा शुक्रिया

भारत के इस मानवीय कदम और समर्थन के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया है।


अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर, बह गए गांव

नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया। अधिकारियों के मुताबिक, पानी का यह अचानक बढ़ना तिब्बत की तरफ से हुआ और देखते ही देखते नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया।

बाढ़ के तेज बहाव में कई घर और गांव बह गए। सड़कों और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क दूसरे क्षेत्रों से टूट गया। नुवाकोट और धादिंग समेत आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का असर देखने को मिला है।

105 भारतीय लापता

इस प्राकृतिक आपदा के बीच बड़ी चिंता भारतीय नागरिकों को लेकर है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 105 भारतीयों के लापता होने की खबर है। बाढ़ प्रभावित इलाके में कई भारतीय नागरिक और पर्यटक मौजूद थे।

अधिकारियों को आशंका है कि राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ लापता लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।

हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू की कोशिश

नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं। हालांकि, कई इलाकों में पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि हेलिकॉप्टरों के लिए उतरना मुश्किल हो रहा है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने पुलिस और सेना को राहत एवं बचाव अभियान में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी के आसपास विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

चीन सीमा पर भी बाढ़ का असर

बाढ़ का असर नेपाल-चीन सीमा तक पहुंच गया है। तिब्बत के शिगात्से क्षेत्र में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट भी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से प्रभावित हुआ है। इससे सड़क, संचार और बिजली व्यवस्था बाधित होने की जानकारी सामने आई है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने और आपदा की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

पिछले साल भी आई थी ऐसी बाढ़

भोटेकोशी नदी में पिछले साल भी भीषण बाढ़ आई थी। उस दौरान 9 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 24 लोग लापता हो गए थे। बाढ़ के कारण नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन कई महीनों तक प्रभावित रहा था।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। खराब मौसम और ऊंचे जलस्तर के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों ने नदी किनारे और बाढ़ संभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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